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तमिलनाडु में सियासी घमासान, स्वतंत्रता दिवस की चाय पार्टी से मुख्यमंत्री स्टालिन ने बनाई दूरी…

Political turmoil in Tamil Nadu, Chief Minister Stalin distanced himself from the Independence Day tea party...

Breaking Today, Digital Desk : तमिलनाडु में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजभवन में होने वाली पारंपरिक चाय पार्टी इस बार सियासी तपिश का केंद्र बन गई है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने राज्यपाल आर.एन. रवि द्वारा आयोजित इस समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। यह कदम राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच चल रहे गहरे मतभेदों को खुलकर सामने लाता है।

क्यों आखिर चाय पर भी मचा है बवाल?

यह बहिष्कार सिर्फ एक चाय पार्टी का नहीं, बल्कि राज्यपाल के हालिया बयानों और फैसलों पर एक कड़ा राजनीतिक संदेश है। तमिलनाडु सरकार ने राज्यपाल पर “राज्य विरोधी” और तमिलनाडु के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है। विवाद का सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) है।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने स्पष्ट किया है कि राज्यपाल के नीट-समर्थक बयानों के विरोध में यह फैसला लिया गया है। हाल ही में नीट परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण एक छात्र और उसके पिता की आत्महत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है, जिसके बाद यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया है। स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल के बयान छात्रों और युवाओं को स्तब्ध करने वाले हैं, खासकर तब जब राज्य विधानसभा नीट से छूट के लिए एक विधेयक पारित कर चुकी है जो राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

टकराव सिर्फ नीट तक सीमित नहीं

राज्यपाल आर.एन. रवि और मुख्यमंत्री स्टालिन के बीच टकराव नया नहीं है। विधानसभा द्वारा पारित कई विधेयकों को राज्यपाल द्वारा मंजूरी न दिए जाने को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। सरकार का आरोप है कि राज्यपाल राज्य के विधायी कार्यों में बाधा डाल रहे हैं और एक चुनी हुई सरकार के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। इस बहिष्कार को इसी शक्ति-परीक्षण के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री ने भी राज्यपाल की उपस्थिति वाले दो विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में शामिल नहीं होने की घोषणा की है, जिससे यह साफ है कि सरकार इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में केंद्र-राज्य संबंधों और राज्यपाल की भूमिका पर एक बड़ी बहस को फिर से हवा दे रहा है।

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