वृंदावन के संत प्रेमानंदजी महाराज से भेंट का संपूर्ण मार्गदर्शन…
Complete guidance for meeting Saint Premanandji Maharaj of Vrindavan

Breaking Today, Digital Desk : राधा रानी के अनन्य भक्त और आज के समय के प्रसिद्ध संत प्रेमानंदजी महाराज से मिलने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक विस्तृत मार्गदर्शिका है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग, जिनमें राजनेता, अभिनेता और क्रिकेटर भी शामिल हैं, उनके दर्शनों के लिए वृंदावन आते हैं। यदि आप भी उनसे मिलने की योजना बना रहे हैं, तो यहां आपको पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है।
प्रेमानंदजी महाराज का आश्रम, श्री राधा हित केली कुंज, वृंदावन में इस्कॉन मंदिर के पास परिक्रमा मार्ग पर भक्ति वेदांत हॉस्पिटल के सामने स्थित है। यहीं पर महाराज जी अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए महाराज जी से मिलने के कुछ तरीके हैं:
पदयात्रा के दौरान दर्शन: महाराज जी प्रतिदिन रात्रि में लगभग 2:30 बजे अपने निवास से आश्रम के लिए पैदल निकलते हैं। इस दौरान भक्तगण परिक्रमा मार्ग पर खड़े होकर उनके दर्शन कर सकते हैं।
सत्संग में उपस्थिति: महाराज जी के सत्संग में शामिल होने के लिए टोकन की व्यवस्था की गई है। ये टोकन आश्रम में सुबह लगभग 9:00 बजे वितरित किए जाते हैं। टोकन प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड साथ ले जाना अनिवार्य है। टोकन मिल जाने पर आप अगले दिन सुबह होने वाले सत्संग में भाग ले सकते हैं।
एकान्तिक वार्तालाप (व्यक्तिगत भेंट): जो श्रद्धालु महाराज जी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपने प्रश्न पूछना चाहते हैं, उनके लिए एकान्तिक वार्तालाप की व्यवस्था है। इसके लिए भी टोकन लेना पड़ता है। टोकन मिलने पर आपको अगले दिन सुबह लगभग 6:30 बजे आश्रम पहुंचना होता है, जहाँ आप लगभग एक घंटे तक महाराज जी से संवाद कर सकते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें:
महाराज जी से मिलने और सत्संग में भाग लेने के लिए आश्रम द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है।
भक्तों की अधिक संख्या के कारण दर्शन और एकान्तिक वार्ता के लिए दो से तीन दिन का इंतजार करना पड़ सकता है।
आश्रम में बच्चों को साथ न लाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि उनकी एंट्री प्रतिबंधित है।
सत्संग के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग पूरी तरह से वर्जित है।
यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि सभी भक्तों को सुचारू और शांतिपूर्ण तरीके से महाराज जी के दर्शन और सान्निध्य का लाभ मिल सके।






