
Breaking Today, Digital Desk : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए दावा किया है कि झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें ‘हनी ट्रैप’ में फंसाने की कोशिश की गई थी. उन्होंने इसे एक बड़ी “राजनीतिक साजिश” करार दिया है. इस मामले ने झारखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है.
यह मामला तब सामने आया जब झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों के दौरान असम के मुख्यमंत्री को फंसाने की साजिश रची थी. मरांडी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सवाल किया कि झारखंड के किस वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने किसी को पैसे देकर दो बार दिल्ली और गुवाहाटी भेजा था, ताकि हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ साजिश रची जा सके.
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री सरमा ने इस घटना की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान दो महिलाएं उनसे दिसपुर स्थित उनके कार्यालय में मिलने आई थीं. उन्होंने कहा, “वे संदिग्ध तरीके से बात कर रही थीं, लेकिन मैंने उनसे उसी तरह बात की जैसे मैं आम जनता से मिलता हूं और उन्हें भेज दिया.” सरमा, जो झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के प्रभारी थे, ने कहा कि वह इस मामले पर बाबूलाल मरांडी से बात कर और जानकारी लेंगे.
मरांडी ने इस मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा था या उनकी जानकारी के बिना. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.
यह आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब झारखंड की राजनीति पहले से ही गरमाई हुई है. हाल ही में, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बीच, उन पर झारखंड पुलिस द्वारा पांच महीने तक निगरानी रखने के भी आरोप लगे थे. असम के मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि दिल्ली के एक होटल में चंपई सोरेन पर नजर रखते हुए विशेष शाखा के दो अधिकारियों को पकड़ा गया था.
इन घटनाओं ने झारखंड में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें अब हनी ट्रैप और जासूसी जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हो गए हैं. भाजपा इस मामले की गहन जांच की मांग कर रही है.






