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बिना भेदभाव के विकास, सीएम योगी ने बताया 2047 के ‘राम राज्य’ का मतलब…

Development without discrimination, CM Yogi explained the meaning of 'Ram Rajya' of 2047

Breaking Today, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में 2047 तक ‘राम राज्य’ की स्थापना के लक्ष्य को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को एक नई दिशा दी है। विधानसभा में रामचरितमानस की चौपाई का पाठ करते हुए उन्होंने इस दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता को ‘राम राज्य’ की अवधारणा का आधार बताया गया है।

यह घोषणा उत्तर प्रदेश के ‘विजन 2047’ दस्तावेज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत की स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक राज्य के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करता है। इस विजन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश का सबसे विकसित राज्य बनाना है, जिसमें विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा, शून्य गरीबी और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे लक्ष्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि ‘राम राज्य’ एक ऐसी शासन व्यवस्था है जहां जाति, धर्म या पंथ के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश समाजवाद से नहीं, बल्कि ‘राम राज्य’ के सिद्धांतों से चलेगा, जो आर्थिक संपन्नता और प्रत्येक नागरिक के लिए खुशहाली सुनिश्चित करेगा।

यह बयान अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद आया है, जिसे एक सांस्कृतिक पुनरुत्थान के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ने ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में ‘राम राज्य’ की दृष्टि को महत्वपूर्ण बताया है।

हालांकि, ‘राम राज्य’ की इस अवधारणा की व्याख्या को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस भी छिड़ी है। विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और भाजपा के सहयोगी दलों ने इसका समर्थन किया है।

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