क्या आपके घर में मंदिर सही जगह है, जानिए वास्तु के अनसुने रहस्य…
Is a temple the right place in your house, Know the unheard secrets of Vastu...

Breaking Today, Digital Desk : हम सभी के घर में एक छोटा सा मंदिर या पूजा स्थल होता है, जहाँ हम अपने इष्टदेव की पूजा करते हैं। यह घर का वह कोना होता है जहाँ हमें शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के मंदिर में भगवान की मूर्ति या तस्वीर किस दिशा में रखनी चाहिए? वास्तु शास्त्र के अनुसार, सही दिशा में रखी गई भगवान की मूर्ति घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लाती है, वहीं गलत दिशा इसके विपरीत प्रभाव डाल सकती है।
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व बताया गया है। जब बात घर के मंदिर की आती है, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
किस दिशा में हो भगवान का मुख?
वास्तु नियमों के अनुसार, जब आप पूजा कर रहे हों, तो आपका मुख हमेशा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इसका मतलब है कि भगवान की मूर्ति या तस्वीर इस तरह से स्थापित करें कि उनका मुख पश्चिम दिशा की ओर हो। ऐसा करने से पूजा का पूरा फल मिलता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पूर्व दिशा को सूर्योदय की दिशा माना जाता है और यह नई शुरुआत, ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक है।
उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण है सबसे शुभ
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को देवी-देवताओं का स्थान माना गया है। यदि संभव हो, तो अपने घर का मंदिर इसी दिशा में स्थापित करें। इस दिशा में मंदिर होने से घर में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। यह कोण ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर में रहने वाले सदस्यों के लिए शुभ फलदायी होता है।
किन बातों से बचें?
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दक्षिण दिशा: भूलकर भी भगवान की मूर्ति का मुख दक्षिण दिशा की ओर न करें। वास्तु के अनुसार, यह दिशा शुभ नहीं मानी जाती और नकारात्मकता ला सकती है।
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एक से अधिक मूर्तियां: एक ही भगवान की एक से अधिक मूर्तियां या तस्वीरें मंदिर में न रखें। यदि हैं, तो उन्हें अलग-अलग जगह रखें, ताकि वे एक-दूसरे के सामने न हों।
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टूटी हुई मूर्तियां: खंडित या टूटी हुई मूर्तियों को तुरंत मंदिर से हटा दें। इन्हें घर में रखना अशुभ माना जाता है।
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शौचालय के पास: मंदिर को कभी भी शौचालय या बाथरूम की दीवार से सटाकर न बनाएं। यह स्थान अपवित्र माना जाता है।
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सीढ़ियों के नीचे: सीढ़ियों के नीचे भी मंदिर बनाना वर्जित है, क्योंकि यह शुभ ऊर्जा को बाधित करता है।
सही वास्तु नियमों का पालन करके आप अपने घर के मंदिर को और भी पवित्र और शक्तिशाली बना सकते हैं, जिससे आपके घर में हमेशा खुशहाली और सकारात्मकता बनी रहेगी।






