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दशहरा 2025, गलतियों से बचें! रावण दहन से पहले ज़रूर करें ये 3 काम…

Dussehra 2025: Avoid these mistakes, Do these 3 things before burning Ravana...

Breaking Today, Digital Desk : दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहते हैं, भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हर साल यह त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। आइए जानते हैं 2025 में दशहरा कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है, और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

दशहरा 2025: कब है और क्या है शुभ मुहूर्त?

2025 में दशहरा 1 अक्टूबर, बुधवार को मनाया जाएगा।

दशमी तिथि प्रारंभ: 30 सितंबर 2025 को शाम 07:12 बजे
दशमी तिथि समाप्त: 1 अक्टूबर 2025 को शाम 08:35 बजे

श्रवण नक्षत्र प्रारंभ: 1 अक्टूबर 2025 को सुबह 06:15 बजे
श्रवण नक्षत्र समाप्त: 2 अक्टूबर 2025 को सुबह 07:10 बजे

विजय मुहूर्त: 1 अक्टूबर 2025 को दोपहर 02:07 बजे से दोपहर 02:54 बजे तक
अपराह्न पूजा समय: 1 अक्टूबर 2025 को दोपहर 01:20 बजे से दोपहर 03:41 बजे तक

इन शुभ मुहूर्तों में पूजा-पाठ और रावण दहन करना बेहद शुभ माना जाता है।

दशहरा का महत्व क्या है?

दशहरा का त्योहार कई कारणों से महत्वपूर्ण है। मुख्य रूप से यह भगवान राम की लंकापति रावण पर विजय और माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने की खुशी में मनाया जाता है। यह हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा जीत होती है, चाहे बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो।

  • भगवान राम की विजय: इस दिन भगवान राम ने 10 सिर वाले राक्षस रावण का वध किया था। यह घटना बुराई और अधर्म पर धर्म और न्याय की जीत का प्रतीक है।

  • माँ दुर्गा की शक्ति: कई जगहों पर इस दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध करके पृथ्वी को बचाया था। यह नारी शक्ति और दुष्टों के नाश का प्रतीक है।

  • हथियारों की पूजा (शस्त्र पूजा): इस दिन क्षत्रिय समुदाय अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते हैं, जो उनकी सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक है।

  • नया काम शुरू करना: दशहरा को किसी भी नए काम या उद्यम की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

दशहरा से जुड़ी खास रस्में और रीति-रिवाज

दशहरा का त्योहार कई खास रस्मों और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है:

  1. रावण दहन: शाम के समय खुले मैदानों में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशाल पुतले जलाए जाते हैं। यह बुराई के अंत का प्रतीक है।

  2. शमी पूजा: इस दिन शमी वृक्ष की पूजा की जाती है, जिसे विजय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष में ही छिपाए थे।

  3. अस्त्र-शस्त्र पूजा: कई घरों और समुदायों में इस दिन अपने औजारों, वाहनों और हथियारों की पूजा की जाती है।

  4. दशहरा मेला: कई जगहों पर दशहरे के अवसर पर बड़े-बड़े मेले लगते हैं, जहां लोग इकट्ठा होते हैं और खुशियां मनाते हैं।

  5. जलेबी और पकवान: इस दिन घरों में खास पकवान बनते हैं, और जलेबी खाना एक पुरानी परंपरा है।

  6. रामायण का पाठ और रामलीला: नवरात्रि के दौरान शुरू हुई रामलीला का समापन दशहरे के दिन होता है, जिसमें राम और रावण के युद्ध का मंचन किया जाता है।

दशहरा 2025: कैसे मनाएं?
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  • घर के मंदिर में भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी की पूजा करें।

  • शमी वृक्ष की पूजा करें और उसके पत्तों को घर में लाएं, जिन्हें सोना माना जाता है।

  • अपने शस्त्रों (यदि हों) या औजारों की सफाई करके उनकी पूजा करें।

  • शाम को रावण दहन देखने जाएं और बुराई के नाश का संकल्प लें।

  • बड़ों का आशीर्वाद लें और छोटों को प्यार दें।

दशहरा हमें याद दिलाता है कि हमें हमेशा धर्म और सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए और जीवन में आने वाली हर चुनौती का डटकर सामना करना चाहिए। यह त्योहार आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए!

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