
Breaking Today, Digital Desk : कुछ घंटों की भारी बारिश ने मिलेनियम सिटी गुरुग्राम को मानो थाम सा दिया, जिससे शहर के कई हिस्से जलमग्न हो गए और नागरिकों में गुस्सा फूट पड़ा. सड़कों पर पानी भरने से लेकर घरों में सीवेज का पानी घुसने तक, लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. इस बदहाली के लिए शहरवासियों ने सीधे तौर पर नागरिक अधिकारियों की उदासीनता और लचर बुनियादी ढांचे को जिम्मेदार ठहराया है.
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण शहर के प्रमुख इलाके जैसे गोल्फ कोर्स रोड, पालम विहार, नरसिंहपुर और राजीव चौक अंडरपास पानी में डूब गए. स्थिति इतनी विकराल हो गई कि वाहनों को डूबा हुआ देखा गया और यात्रियों को घुटनों तक पानी से गुजरना पड़ा. सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी भड़ास निकालते हुए गुरुग्राम को “जलग्राम” तक कह डाला और जलभराव की तस्वीरें और वीडियो साझा किए. कई पॉश इलाकों के घरों में भी पानी घुसने की खबरें सामने आईं.
शहर की इस दुर्दशा के कारण कई दुखद घटनाएं भी हुईं. रिपोर्टों के अनुसार, बिजली के झटके, डूबने और सड़क दुर्घटनाओं में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई. इस त्रासदी ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जलभराव वाली सड़क पर मोटरसाइकिल फिसलने और बिजली के खंभे की चपेट में आने से मौत हो गई, जबकि एक फूड डिलीवरी एक्जीक्यूटिव की भी इसी तरह की परिस्थितियों में जान चली गई.
नागरिकों ने नगर निगम गुरुग्राम (MCG) और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर किया. लोगों ने अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था और चल रही निर्माण परियोजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. कुछ निवासियों ने तो हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय को भी टैग करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की.
यह समस्या केवल सड़कों तक ही सीमित नहीं रही. पालम विहार, सुशांत लोक और सेक्टर 5, 6, 10ए और 15 जैसे रिहायशी इलाकों में लोगों के घरों में पानी भर गया और सीवेज का पानी उल्टा बहने लगा. शहर के एक निवासी ने तंज कसते हुए कहा कि जिसने भी गुड़गांव का नाम रखा, सही रखा, क्योंकि यह एक गांव जैसा ही है. जलभराव की इस गंभीर समस्या का मामला संसद तक भी पहुंचा, जहां इस पर सवाल उठाए गए.
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर का अनियोजित विकास और पारंपरिक जल निकासी प्रणालियों का खत्म होना इस समस्या का मूल कारण है. कंक्रीट के बढ़ते जंगल ने बारिश के पानी को जमीन में समाने से रोक दिया है, जिससे भूजल स्तर में भी भारी गिरावट आई है. हर साल मानसून में होने वाली इस तरह की घटनाओं के बावजूद, कोई ठोस समाधान न होने से नागरिकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है.




