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पुतिन की अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं प्रतिबंध, यूक्रेन के राष्ट्रपति की मानें तो…

How much damage are sanctions doing to Putin's economy, if the Ukrainian president is to be believed...

Breaking Today, Digital Desk : यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की का कहना है कि रूस पर लगे प्रतिबंध व्लादिमीर पुतिन के लिए एक ‘दर्दनाक झटका’ साबित हो रहे हैं। उनका दावा है कि इन प्रतिबंधों से रूस की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लेकिन, क्या वाकई ऐसा है? क्या पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए इन कड़े प्रतिबंधों का रूस पर उतना ही असर हो रहा है, जितना ज़ेलेंस्की कह रहे हैं? आइए जानने की कोशिश करते हैं।

जब से रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है, तब से अमेरिका और यूरोपीय देशों सहित कई पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें रूस के बैंकों को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से बाहर करना, ऊर्जा निर्यात पर रोक लगाना और कई रूसी अरबपतियों की संपत्तियां फ्रीज करना शामिल है। इन प्रतिबंधों का मकसद रूस की युद्ध करने की क्षमता को कमजोर करना और उसे आर्थिक रूप से घुटनों पर लाना था।

शुरुआत में ऐसा लगा कि ये प्रतिबंध वाकई रूस के लिए मुसीबत बन रहे हैं। रूसी रूबल तेजी से गिर गया था और महंगाई आसमान छूने लगी थी। कई अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने रूस में अपना कारोबार बंद कर दिया था, जिससे हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं। एक समय तो ऐसा लगने लगा था कि रूस की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से टूट जाएगी।

हालांकि, अब कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि रूस ने इन प्रतिबंधों का सामना करने के लिए कुछ हद तक खुद को ढाल लिया है। रूसी सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने रूबल को स्थिर करने के लिए उपाय किए और अपनी ऊर्जा को पश्चिमी देशों के बजाय भारत और चीन जैसे अन्य देशों को बेचना शुरू कर दिया। कच्चे तेल और गैस की ऊंची कीमतों ने भी रूस को काफी मदद की है, क्योंकि इससे उन्हें काफी कमाई हुई है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की अर्थव्यवस्था अभी भी संघर्ष कर रही है, खासकर लंबी अवधि में। नए निवेश की कमी, तकनीक तक पहुंच में रुकावट और कुशल श्रमिकों के पलायन जैसी समस्याएं रूस के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। लेकिन, तुरंत collapse होने का खतरा शायद टल गया है।

ज़ेलेंस्की का बयान शायद यूक्रेन के लोगों का मनोबल बढ़ाने और पश्चिमी देशों को यह संदेश देने के लिए हो सकता है कि उनके प्रतिबंध काम कर रहे हैं। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि रूस की अर्थव्यवस्था वास्तव में कितनी कमजोर हुई है। यह एक जटिल स्थिति है, जिसमें समय के साथ बदलाव आते रहेंगे।

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