Sliderअन्य

स्तनपान से जुड़े मिथकों का खंडन, हर नई माँ के लिए महत्वपूर्ण जानकारी…

Breastfeeding myths busted, important information for every new mother

Breaking Today, Digital Desk : मातृत्व एक खूबसूरत अहसास है, लेकिन इसके साथ ही नई माँओं के मन में कई सवाल और चिंताएँ भी होती हैं, खासकर स्तनपान को लेकर। स्तनपान शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है, यह बात तो सभी जानते हैं, लेकिन इससे जुड़ी कई गलत धारणाएं और मिथक नई माँओं को अक्सर भ्रमित और परेशान कर देते हैं। आइए, इन मिथकों को तोड़ें और स्तनपान से जुड़ी सच्चाई जानें ताकि हर माँ आत्मविश्वास के साथ इस सुखद यात्रा को अपना सके।

स्तनपान कराने से माँ शारीरिक रूप से कमजोर हो जाती है।

सच्चाई: यह पूरी तरह से एक मिथक है। स्तनपान कराने से माँ कमजोर नहीं होती, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। प्रसव के बाद होने वाले तनाव और रक्तस्राव जैसी समस्याओं पर जल्द नियंत्रण पाने में स्तनपान मदद करता है। हाँ, थकान और कमजोरी का कारण स्तनपान नहीं, बल्कि अपर्याप्त पोषण, नींद की कमी या गलत शारीरिक मुद्रा हो सकता है। स्तनपान कराने वाली माताओं को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए और पौष्टिक आहार लेना चाहिए।

शुरुआती गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए हानिकारक है।

सच्चाई: यह एक बहुत ही गंभीर और हानिकारक भ्रम है। प्रसव के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक आने वाला गाढ़ा, पीला दूध जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं, शिशु के लिए अमृत समान होता है। यह शिशु का पहला टीका माना जाता है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज और पोषक तत्व होते हैं जो शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं और उसे कई संक्रमणों से बचाते हैं।

यदि शिशु बार-बार दूध पीता है, तो इसका मतलब है कि माँ का दूध पर्याप्त नहीं है।

सच्चाई: यह धारणा गलत है। माँ का दूध बहुत सुपाच्य होता है, इसलिए शिशु को जल्दी-जल्दी भूख लग सकती है। फॉर्मूला दूध की तुलना में स्तनपान करने वाले बच्चे अक्सर अधिक बार दूध पीते हैं। शिशु की भूख के संकेतों को पहचानना महत्वपूर्ण है, जैसे उसका हाथ या उंगली चूसना या स्तन की तलाश करना।

बीमार होने पर माँ को स्तनपान नहीं कराना चाहिए।

सच्चाई: सर्दी-जुकाम या हल्के बुखार जैसी सामान्य बीमारियों में स्तनपान जारी रखना चाहिए। वास्तव में, इस दौरान माँ के शरीर में जो एंटीबॉडीज बनती हैं, वे दूध के माध्यम से शिशु तक पहुँचकर उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करती हैं। गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

स्तनपान कराने से स्तनों का आकार बिगड़ जाता है।

सच्चाई: गर्भावस्था, हार्मोनल परिवर्तन और उम्र स्तनों के आकार और कसाव में बदलाव के लिए अधिक जिम्मेदार होते हैं, न कि स्तनपान। स्तनपान कराने या न कराने से स्तनों के आकार पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ता है।

छोटे स्तन वाली महिलाएँ पर्याप्त दूध का उत्पादन नहीं कर सकती हैं।

सच्चाई: स्तनों का आकार दूध उत्पादन की क्षमता को निर्धारित नहीं करता है। दूध का उत्पादन स्तनों में मौजूद ग्रंथियों के ऊतकों (glandular tissue) द्वारा होता है, न कि वसा ऊतकों (fat tissue) द्वारा जो स्तनों के आकार के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसलिए, स्तनों के आकार का दूध की मात्रा से कोई सीधा संबंध नहीं है।

नई माँओं के लिए कुछ अतिरिक्त सुझाव:

पौष्टिक आहार लें: अपने आहार में ताजे फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और डेयरी उत्पादों को शामिल करें।

हाइड्रेटेड रहें: दिनभर में खूब पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।

सही पोजीशन और लैच सीखें: स्तनपान कराते समय सही पोजीशन में बैठना और शिशु का सही तरीके से स्तन से जुड़ाव (लैच) बहुत महत्वपूर्ण है। इससे स्तनपान आरामदायक होता है और निप्पल में दर्द जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है

मदद मांगने में संकोच न करें: यदि आपको स्तनपान कराने में कोई भी कठिनाई हो रही है, तो अपनी डॉक्टर, नर्स या किसी स्तनपान विशेषज्ञ (lactation consultant) से मदद लेने में संकोच न करें।

स्तनपान माँ और शिशु के बीच एक मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनाता है। यह न केवल शिशु को सर्वोत्तम पोषण प्रदान करता है, बल्कि माँ को भी कई स्वास्थ्य लाभ देता है, जिसमें स्तन और गर्भाशय के कैंसर का खतरा कम होना भी शामिल है। इसलिए, सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करने के बजाय, वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें और आत्मविश्वास के साथ मातृत्व के इस अनमोल पड़ाव का आनंद लें।

Related Articles

Back to top button