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ताजमहल में श्री राम लिखे बैग पर विवाद, जानिए पूरा सच…

Controversy over bag with Shri Ram written on it in Taj Mahal, know the whole truth

Breaking Today, Digital Desk : आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल में एक बार फिर प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जब उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसे ‘श्री राम’ लिखा बैग ले जाने के कारण अंदर नहीं जाने दिया गया. यह घटना उस समय सामने आई जब पर्यटक ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया. हालाँकि, सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है.

पर्यटक आशीष कुमार का दावा है कि जब वे अपना बैग स्केनिंग मशीन से गुजार कर प्रवेश कर रहे थे, तो एक सुरक्षाकर्मी ने उन्हें रोक दिया. आशीष के अनुसार, जवान ने उनसे कहा कि वह इस बैग के साथ अंदर नहीं जा सकते क्योंकि उस पर ‘जय श्री राम’ लिखा हुआ है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भगवा वस्त्र और बैग पर भगवान राम का नाम होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया. इस घटना के बाद, आशीष और उनके साथियों ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताते हुए ताजमहल में प्रवेश न करने का निर्णय लिया.

सुरक्षा एजेंसी ने दिया नियमों का हवाला

मामला वायरल होने के बाद, सीआईएसएफ ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पर्यटक को धार्मिक प्रतीक के कारण नहीं, बल्कि बैग में प्रतिबंधित वस्तुएं होने के कारण रोका गया था. सीआईएसएफ के एक वरिष्ठ कमांडेंट ने बताया कि स्कैनिंग के दौरान पर्यटक के बैग में सुपारी, तंबाकू और सुपारी कटर जैसी चीजें मिलीं, जिन्हें स्मारक परिसर में ले जाना प्रतिबंधित है. उन्हें इन वस्तुओं को बाहर रखने या बैग को लॉकर में जमा करने के लिए कहा गया था.

ताजमहल में क्या हैं प्रवेश के नियम?

यह घटना ताजमहल में प्रवेश से जुड़े सख्त नियमों को फिर से उजागर करती है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियमों के अनुसार, स्मारक की सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए कई वस्तुओं पर प्रतिबंध है. इनमें खाने-पीने का सामान, तंबाकू उत्पाद, सिगरेट, लाइटर, हथियार, चाकू जैसी धारदार वस्तुएं और बड़ी बैग-किताबें शामिल हैं. हालांकि, पर्यटकों को एक छोटी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति है. बड़े बैग और बैकपैक ले जाने की अनुमति नहीं है ताकि सुरक्षा जांच में तेजी लाई जा सके और परिसर को साफ रखा जा सके.

यह पहली बार नहीं है जब ताजमहल में धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवाद हुआ है. पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां ‘श्री राम’ लिखे दुपट्टे पहनने वाले समूहों या साधु-संतों को उनके पहनावे या साथ में दण्ड जैसी वस्तुएं ले जाने के कारण रोका गया. हर बार अधिकारियों ने यही स्पष्ट किया है कि नियम सभी के लिए समान हैं और किसी विशेष धर्म को निशाना नहीं बनाया जाता. उनका मुख्य उद्देश्य यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सुरक्षा और पवित्रता सुनिश्चित करना है.

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