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जानिये फ्लोरिडा के इस फ़ैसले से भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्या असर पड़ेगा…

Find out how this Florida decision will impact Indian professionals...

Breaking Today, Digital Desk : फ़्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसेंटिस ने हाल ही में एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि अब राज्य की सरकारी यूनिवर्सिटीज़ में H-1B वीज़ा पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर नहीं रखा जाएगा. इस फ़ैसले का सीधा मतलब यह है कि अब इन पदों पर सिर्फ अमेरिकी नागरिकों को ही नौकरी मिलेगी.

क्यों लिया गया यह फ़ैसला?

गवर्नर डीसेंटिस का कहना है कि इस कदम से अमेरिकी नागरिकों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे. उनका मानना है कि जब अमेरिकी टैलेंट मौजूद है, तो विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीज़ा पर नौकरी देना ठीक नहीं है. इस फ़ैसले के पीछे ‘हायर अमेरिकन्स’ (Hire Americans) की सोच काम कर रही है, जिसके तहत पहले अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी.

H-1B वीज़ा क्या है?

H-1B वीज़ा एक नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा है, जो अमेरिकी कंपनियों को कुछ ख़ास प्रोफेशन में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जहाँ स्पेशलाइज्ड स्किल्स की ज़रूरत होती है. ज़्यादातर भारतीय प्रोफेशनल्स इस वीज़ा के ज़रिए अमेरिका में काम करने जाते हैं, खासकर IT सेक्टर में.

फ़्लोरिडा के इस फ़ैसले का क्या असर होगा?

इस फ़ैसले से उन भारतीय प्रोफेशनल्स पर सीधा असर पड़ेगा, जो फ़्लोरिडा की यूनिवर्सिटीज़ में काम करने का सपना देख रहे थे या कर रहे थे. अब उन्हें दूसरे राज्यों या सेक्टर्स में मौके तलाशने पड़ेंगे. साथ ही, उन यूनिवर्सिटीज़ को भी अपनी हायरिंग पॉलिसीज़ में बदलाव करने होंगे.

इस फ़ैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं. जहाँ कुछ लोग इसे अमेरिकी नागरिकों के हित में बता रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि इससे टैलेंट की कमी हो सकती है और यूनिवर्सिटीज़ को स्किल्ड प्रोफेशनल्स ढूंढने में दिक्कत आ सकती है.

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