महाभारत जब भगवान श्रीकृष्ण की एक चाल ने अर्जुन को आत्मदाह से बचाया…
Mahabharata When a trick of Lord Krishna saved Arjun from self-immolation

Breaking Today, Digital Desk : महाभारत के युद्ध में एक ऐसा समय आया जब पांडव पक्ष के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक, अर्जुन, ने अपने ही प्राण त्यागने की प्रतिज्ञा कर ली थी। यह घटना उनके प्रिय पुत्र अभिमन्यु की दुखद मृत्यु के बाद हुई। कौरव सेना ने चक्रव्यूह की रचना की थी और अभिमन्यु उसमें प्रवेश करने के बाद अकेले ही सात महारथियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। जयद्रथ ने अन्य पांडवों को चक्रव्यूह में प्रवेश करने से रोककर अभिमन्यु की मृत्यु में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
अपने पुत्र की मृत्यु से शोकाकुल और क्रोधित अर्जुन ने यह भयंकर प्रतिज्ञा ली कि अगले दिन सूर्यास्त से पहले वे जयद्रथ का वध कर देंगे, और यदि ऐसा करने में वे असफल रहे, तो वे स्वयं को अग्नि में समर्पित कर देंगे। यह सुनकर कौरव खेमे में हलचल मच गई और उन्होंने जयद्रथ को बचाने की पूरी योजना बना ली। अगले दिन, गुरु द्रोणाचार्य ने एक अभेद्य सैन्य रचना बनाकर जयद्रथ को सबसे अंत में छिपा दिया।
अर्जुन ने पूरा दिन घनघोर युद्ध किया, लेकिन वे जयद्रथ तक नहीं पहुँच सके। जैसे-जैसे दिन ढलने लगा और सूर्यास्त का समय निकट आया, अर्जुन की विफलता निश्चित लगने लगी। अर्जुन को अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार आत्मदाह के लिए तैयार होता देख, उनके सारथी और मार्गदर्शक, भगवान श्रीकृष्ण ने एक अद्भुत चाल चली। उन्होंने अपनी योगमाया से सूर्य को ढक दिया, जिससे चारों ओर संध्या का भ्रम फैल गया और ऐसा प्रतीत हुआ मानो सूर्यास्त हो गया हो।
यह सोचकर कि अर्जुन अब कुछ नहीं कर सकते और उन्हें आत्मदाह करना होगा, कौरव सेना जयद्रथ के साथ अपनी जीत का जश्न मनाने लगी। जयद्रथ स्वयं भी अर्जुन का उपहास करने के लिए अपने सुरक्षा घेरे से बाहर आ गया। ठीक उसी क्षण, भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माया हटा दी और सूर्य फिर से आकाश में चमकने लगा। श्रीकृष्ण ने तुरंत अर्जुन को अभी तक दिन शेष होने का स्मरण कराते हुए जयद्रथ की ओर इशारा किया। पलक झपकते ही, अर्जुन ने अपना गांडीव उठाया और एक शक्तिशाली बाण से जयद्रथ का सिर धड़ से अलग कर दिया, जिससे उनकी प्रतिज्ञा पूरी हुई। इस प्रकार, एक कृत्रिम सूर्य ग्रहण की घटना ने न केवल अर्जुन के प्राणों की रक्षा की, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना के युद्ध में एक महत्वपूर्ण मोड़ भी साबित हुई।






