
Breaking Today, Digital Desk : राष्ट्रीय अस्थि एवं जोड़ दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं में बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ रही जोड़ों की समस्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एक समय था जब जोड़ों का दर्द केवल बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, लेकिन आज यह बीमारी युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के युवा घंटों तक एक ही जगह पर बैठकर काम करते हैं, शारीरिक गतिविधियों में कमी आई है और खानपान की आदतें भी बिगड़ी हैं। यह निष्क्रिय जीवनशैली, मोटापा और गलत व्यायाम तकनीक युवाओं के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है, जिससे उनमें कम उम्र में ही आर्थराइटिस (गठिया), पीठ दर्द और घुटनों की समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
मुंबई के एक प्रसिद्ध घुटने, कंधे और कूल्हे के सर्जन ने बताया कि पिछले 15 सालों में 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में जोड़ों के रोग में चिंताजनक वृद्धि हुई है। इनमें मैकेनिकल पीठ दर्द, कार्टिलेज का घिसना और ACL या मेनिस्कस टियर जैसी समस्याएं आम हैं यह प्रवृत्ति विशेष रूप से शहरी भारत में देखी जा रही है, जहाँ खराब पोस्चर, डेस्क पर लंबे समय तक काम करना, और असंतुलित आहार आम बात है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 5 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी तरह के मस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशियों और हड्डियों से संबंधित) विकार से पीड़ित है। इनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस सबसे आम है, खासकर घुटनों के जोड़ों में। 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं, विशेषकर रजोनिवृत्ति के बाद, हार्मोनल बदलावों के कारण पुरुषों की तुलना में अधिक प्रभावित होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में साधारण बदलाव लाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन को नियंत्रित रखना और सही पोस्चर बनाए रखना जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद ज़रूरी है। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे सैल्मन, अलसी और अखरोट का सेवन सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।






