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सिर्फ एक मंत्र से माँ कूष्मांडा पूरी करेंगी हर मनोकामना, आज ही आजमाएं…

With just one mantra, Mother Kushmanda will fulfill all your wishes, try it today...

Breaking Today, Digital Desk : नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्मांडा को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि देवी कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से इस पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी। यही कारण है कि उन्हें सृष्टि की आद्य शक्ति भी कहा जाता है।

माँ कूष्मांडा का स्वरूप

माँ कूष्मांडा के आठ हाथ हैं और वे सिंह पर विराजमान हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला जैसे अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। उनका आठवां हाथ सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाला है।

पूजा विधि

नवरात्रि के चौथे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। माँ कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। माँ को लाल फूल, लाल चंदन, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें। उन्हें मालपुए का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद माँ के मंत्रों का जाप करें और आरती गाएं।

मंत्र

  • ध्यान मंत्र:
    या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

  • स्तोत्र पाठ:
    दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।
    जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणामम्यहम्॥

जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपिणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणामम्यहम्॥

त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दुख शोक निवारिणीम्।
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणामम्यहम्॥

आरती

जय माँ कूष्मांडा देवी, जय माँ कूष्मांडा।
अष्ट भुजा धारी, सिंह पर बैठी,
भक्तों का कष्ट निवारण करे,
मैया तेरी जय जयकार करे।

सृष्टि की रचियता, आदिशक्ति माँ,
तेरी महिमा अपरंपार है।
संसार की जननी, पालनहारी माँ,
तेरी कृपा से सब संसार चले।

भक्तों के दुःख हरती, सुख बरसाती माँ,
तेरी शरण में हम सब आए।
जय माँ कूष्मांडा देवी, जय माँ कूष्मांडा,
तेरा ही गुणगान हम गाएं।

महत्व

माँ कूष्मांडा की पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और आयु, यश, बल व आरोग्य में वृद्धि होती है। माँ अपने भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।

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