
Breaking Today, Digital Desk : नेपाल में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, उसे देखकर कई सवाल उठते हैं। खास तौर पर जब बात युवाओं की आती है, तो उनके विरोध प्रदर्शनों में एक नया पहलू देखने को मिल रहा है – चीनी ऐप्स का इस्तेमाल। लेकिन इससे पहले कि हम उस पर गौर करें, एक नज़र डालते हैं केपी ओली के उस ‘एक गलत फैसले’ पर, जिसने शायद इस अशांति को हवा दी।
केपी ओली का वो एक फैसला…
याद है, कुछ समय पहले की बात है, जब केपी ओली ने अपनी राजनीति में कुछ ऐसे दांव चले, जिन्होंने न सिर्फ नेपाल के अंदर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी थी। उनके कुछ कदम, खासकर भारत के साथ रिश्तों को लेकर, काफी सुर्खियों में रहे। ऐसा लगा जैसे उन्होंने चीन के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश में कुछ ऐसा कर दिया, जिससे उनके ही देश के युवा अब सड़कों पर उतर आए हैं।
नेपाल एक ऐसा देश है, जहाँ भारत और चीन दोनों का ही प्रभाव रहा है। लेकिन ओली के कार्यकाल में चीन का दखल कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था। लोगों को लगने लगा था कि उनकी सरकार सिर्फ चीन की सुन रही है। इसी बीच, कुछ ऐसे फैसले भी लिए गए, जिनसे भ्रष्टाचार और कुशासन की शिकायतें बढ़ने लगीं। इन्हीं सब बातों ने धीरे-धीरे लोगों के मन में गुस्सा भरना शुरू कर दिया।
Gen Z और चीनी ऐप्स का ‘अनोखा’ कनेक्शन
अब आते हैं आज के युवा प्रदर्शनकारियों पर, जिन्हें Gen Z कहा जाता है। ये वो पीढ़ी है जो टेक्नोलॉजी के साथ बड़ी हुई है। इनके विरोध प्रदर्शनों में एक खास बात देखने को मिल रही है – सोशल मीडिया, खासकर चीनी ऐप्स का खूब इस्तेमाल।
आपने देखा होगा, विरोध प्रदर्शनों को लाइव दिखाने के लिए, संदेश फैलाने के लिए और लोगों को एकजुट करने के लिए TikTok, WeChat जैसे ऐप्स का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। यह एक दोहरी तलवार जैसा है। एक तरफ, ये ऐप्स युवाओं को अपनी बात रखने और तुरंत संदेश फैलाने का मौका दे रहे हैं। दूसरी तरफ, इन ऐप्स के जरिए चीन का डेटा कलेक्शन और प्रभाव भी बढ़ रहा है।
सवाल ये है कि क्या Gen Z अनजाने में चीन के ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ को और गहरा कर रहा है, या वे सिर्फ अपनी बात कहने का एक नया माध्यम खोज रहे हैं? शायद दोनों ही बातें सही हैं। ये युवा अपनी आवाज उठाना चाहते हैं, और इसके लिए उन्हें जो भी टूल मिल रहा है, उसका वे इस्तेमाल कर रहे हैं।
लेकिन इस सब के पीछे, केपी ओली का वो एक ‘गलत फैसला’ अभी भी कहीं न कहीं गूंज रहा है। अगर उन्होंने अपने देश के लोगों की भावनाओं को समझा होता और एक संतुलित विदेश नीति अपनाई होती, तो शायद आज नेपाल में ये अशांति इतनी गहरी न होती।
यह सब हमें दिखाता है कि राजनीति में एक छोटा सा गलत कदम भी कैसे पूरे देश के भविष्य को प्रभावित कर सकता है, और कैसे आज की डिजिटल दुनिया में युवा अपनी आवाज उठाने के लिए नए-नए तरीके ढूंढ रहे हैं, भले ही उसके पीछे कुछ अनचाहे प्रभाव भी हों।




