
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में Sharm El Sheikh में हुए एक बड़े इवेंट पर सब की नज़रें थीं – ट्रंप का शिखर सम्मेलन। इस दौरान एक बात जिसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर किया, वो थी हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैरमौमौजूदगी। जहाँ कई बड़े नेता ट्रंप के साथ मंच साझा कर रहे थे, वहीं PM मोदी ने इस से दूरी बनाए रखी। क्या यह एक सोचा-समझा कदम था, या फिर इसके पीछे कोई और कहानी थी? आइए, आज इसी पर थोड़ी बात करते हैं।
देखिये, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हर कदम के अपने मायने होते हैं। कौन कहाँ जाता है, किससे मिलता है, और किससे दूरी बनाता है – यह सब बहुत सोच-समझकर किया जाता है। जब बात ट्रंप और उनके द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम की आती है, तो भारत जैसे देश के लिए और भी सतर्क रहना ज़रूरी हो जाता है।
एक सबसे बड़ी वजह जो समझ में आती है, वो है भारत की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति। भारत हमेशा से किसी एक गुट का हिस्सा बनने से बचता रहा है। चाहे वो अमेरिका हो या कोई और शक्ति, भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखता है। ट्रंप के उस सम्मेलन में शामिल होने से शायद ऐसा संदेश जा सकता था कि भारत किसी एक पक्ष की तरफ झुक रहा है, जो शायद उस समय सही नहीं था।
इसके अलावा, उस समय वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर भारत की अपनी प्राथमिकताएँ थीं। PM मोदी शायद ऐसे किसी सम्मेलन में अपनी ऊर्जा या समय नहीं लगाना चाहते थे, जिसका सीधा लाभ भारत को न मिलता हो। हो सकता है भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने या फिर अपने आंतरिक मुद्दों पर ज़्यादा ध्यान दे रहा हो।
एक और बात जो गौर करने लायक है, वो है वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती हुई साख। अब भारत केवल किसी बड़े देश के साथ खड़े होकर अपनी पहचान नहीं बनाता, बल्कि वह खुद एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति बन चुका है। ऐसे में, किसी खास नेता के बुलावे पर सिर्फ ‘शामिल होने के लिए शामिल होना’ शायद भारत की नई कूटनीति का हिस्सा नहीं है। PM मोदी शायद उन मंचों को प्राथमिकता देते हैं जहाँ भारत की आवाज़ को महत्व मिले और उसके विचारों को गंभीरता से सुना जाए।
तो, अगर मोटे तौर पर देखें तो PM मोदी का ट्रंप के Sharm El Sheikh सम्मेलन से दूर रहना एक बहुत ही सोची-समझी और समझदारी भरी चाल थी। यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती हुई हैसियत को दर्शाता है। शायद इसी को कहते हैं – ‘समझदारी भरा नो-शो’!




