
Breaking Today, Digital Desk : महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के भीतर सत्ता का संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है, जिससे राज्य की राजनीति में एक नए संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा लिए गए कई अहम फैसलों से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नाराजगी की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। दोनों नेताओं के बीच बढ़ती खाई इस बात का संकेत दे रही है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है और यह दरार भविष्य में और चौड़ी हो सकती है।
हाल के घटनाक्रमों ने इस अंदरूनी खींचतान को और हवा दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, शिंदे और उनके समर्थक विधायक फडणवीस की कार्यशैली और महत्वपूर्ण विभागों में उनके सीधे हस्तक्षेप से नाखुश हैं। शिंदे खेमे का मानना है कि सरकार के फैसलों में उन्हें उचित सम्मान और भागीदारी नहीं मिल रही है, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
विवाद के मुख्य बिंदुओं में विभागों का बंटवारा, प्रमुख नियुक्तियां और विकास परियोजनाओं की मंजूरी जैसे मुद्दे शामिल हैं। बताया जा रहा है कि फडणवीस कई महत्वपूर्ण मामलों में शिंदे को विश्वास में लिए बिना ही निर्णय ले रहे हैं, जिससे गठबंधन धर्म का उल्लंघन हो रहा है। हाल ही में, कुछ प्रमुख अधिकारियों के तबादले और शिंदे सरकार के समय शुरू की गई कुछ योजनाओं की समीक्षा के फडणवीस के एकतरफा फैसलों ने आग में घी डालने का काम किया है।
शिंदे गुट के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब हमने पिछली सरकार से बगावत की थी, तो हमें एक सम्मानजनक हिस्सेदारी का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब ऐसा महसूस हो रहा है कि हमें दरकिनार किया जा रहा है।”
हालांकि, दोनों पक्षों के नेता सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह के मतभेद से इनकार कर रहे हैं। देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, जबकि एकनाथ शिंदे ने भी इसे मीडिया द्वारा बनाया गया मुद्दा करार दिया है। लेकिन सरकार के गलियारों में चल रही कानाफूसी और दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखी असहजता कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह सत्ता संघर्ष जल्द ही नहीं सुलझा तो इसका सीधा असर महाराष्ट्र के विकास और प्रशासनिक स्थिरता पर पड़ सकता है। विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है और इसे महायुति गठबंधन के अंत की शुरुआत बता रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस संकट को कैसे संभालता है और क्या शिंदे और फडणवीस के बीच की यह राजनीतिक खाई पाटी जा सकेगी, या फिर यह महाराष्ट्र में एक नए राजनीतिक समीकरण को जन्म देगी।






