
Breaking Today, Digital Desk : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने ‘निजी प्रतिबद्धताओं’ का हवाला देते हुए केरल में होने वाले एक अयप्पा कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया है। यह फैसला एक बड़े विवाद के बाद आया है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्टालिन की भागीदारी का पुरजोर विरोध किया था।
केरल की वामपंथी सरकार ने स्टालिन को पम्पा में आयोजित होने वाले ‘ग्लोबल अयप्पा संगम’ के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, भाजपा ने इस निमंत्रण को ‘पाखंड’ करार दिया। केरल भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस निमंत्रण की तुलना “हिटलर द्वारा यहूदियों का जश्न मनाने” से की, जिससे यह विवाद और भी गहरा गया।
भाजपा का यह विरोध स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म के खिलाफ की गई टिप्पणियों के बाद हुआ है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि स्टालिन और उनके बेटे ने बार-बार हिंदुओं का अपमान किया है।
तमिलनाडु सरकार ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों के कारण अयप्पा संगम में भाग लेने में असमर्थ हैं। उनकी जगह पर, तमिलनाडु के दो मंत्री, शेखर बाबू और पीटीआर पलानिवेल थियागराजन, इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
विवाद के तूल पकड़ने और चौतरफा आलोचना के बाद, स्टालिन के कार्यालय ने उनकी अनुपस्थिति का कारण ‘निजी व्यस्तता’ बताया। इस घटनाक्रम ने दक्षिण भारत में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें धर्म और राजनीति के बीच की महीन रेखा एक बार फिर उजागर हुई है।






