योगी सरकार की पहल से आकांक्षी जनपदों में दिख रहा है परिवर्तन, सोनभद्र और चंदौली बने विकास के मॉडल

लखनऊ, 15 जुलाई 2025। उत्तर प्रदेश सरकार के आकांक्षी जनपद मॉडल ने विकास की जो नई इबारत लिखी है, उसका प्रभाव अब ज़मीन पर साफ़ नजर आने लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राज्य के पिछड़े माने जाने वाले जिलों में नवाचारों के ज़रिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है। इसका बेहतरीन उदाहरण हैं सोनभद्र और चंदौली जिले, जहां सरकारी योजनाओं के साथ स्थानीय प्रशासन और जनसहभागिता के तालमेल से जीवनशैली में आमूल-चूल बदलाव आया है। आकांक्षी जनपद सोनभद्र में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निपुण डैशबोर्ड जैसी डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। यह डैशबोर्ड शिक्षकों, छात्रों की उपस्थिति और सीखने की प्रगति को रियल टाइम में मॉनिटर करता है। इसके चलते बच्चों के सीखने के स्तर में वृद्धि हुई है और शिक्षण में पारदर्शिता आई है। इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय काम किया है। लगभग 50 स्वयं सहायता समूह हैंडमेड गोट मिल्क सोप बनाकर बाजार में बेच रहे हैं, जिससे उनकी आय बढ़ी है और उद्यमिता को बढ़ावा मिला है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए “मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी” अभियान के अंतर्गत प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन व पुनर्चक्रण पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा क्लस्टर आवास योजना के तहत आदिवासी समुदायों को पक्के मकान और मूलभूत सुविधाएं प्रदान की गई हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक जीवन स्तर में बदलाव आया है। दूसरी ओर चंदौली जिला, जिसे नीति आयोग द्वारा देश के 112 आकांक्षी जनपदों में छठा स्थान दिया गया है, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचारों के चलते देश-दुनिया में पहचान बना रहा है। यहां के किसानों ने काला धान की ऑर्गेनिक फार्मिंग को अपनाया है, जो पूरी तरह रसायनमुक्त है और पोषण से भरपूर मानी जाती है। काला धान को IIRR (भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान) से प्रमाणन प्राप्त है और अब इसकी मांग भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हुई है बल्कि जनपद को एक अनूठी पहचान भी मिली है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में चंदौली के सिकंदरपुर चकिया क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) द्वारा डिज़ाइन किया गया अंतरा ट्रैकिंग बैग, जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों में एक अभिनव और प्रभावी उपकरण साबित हो रहा है। यह बैग अंतरा गर्भनिरोधक इंजेक्शन का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखता है और महिला लाभार्थियों को समय पर सेवाएं देने में मदद करता है। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ी है, बल्कि फॉलोअप की प्रक्रिया भी सटीक हो गई है। सोनभद्र और चंदौली के इन नवाचारों ने नीति आयोग के आकांक्षी जनपद मॉडल की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया है। ये जिले आज न केवल अपने प्रदर्शन से आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि अन्य जनपदों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रहे हैं। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के ये पिछड़े जिले अब विकास के रोल मॉडल बनकर उभरे हैं। इनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि जब योजनाएं नीयत के साथ लागू होती हैं, तो हर इलाका आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर बढ़ता है।






