
Breaking Today, Digital Desk : बिहार की राजनीति में ‘सियासी विरासत’ एक जाना-पहचाना शब्द है। कई युवा नेता अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अपने परिवार की विरासत से करते हैं। इन सबके बीच एक नाम है जो हमेशा चर्चा में रहता है, वो हैं तेजस्वी यादव। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे हैं। लालू यादव भारतीय राजनीति के उन चेहरों में से हैं, जिन्हें या तो बेहद पसंद किया जाता है या उनकी तीखी आलोचना होती है। ऐसे में तेजस्वी के लिए अपने पिता की मजबूत राजनीतिक परछाई से बाहर निकलना एक बड़ी चुनौती बन गई है।
तेजस्वी ने भले ही राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की हो, लेकिन अक्सर उनकी तुलना उनके पिता से की जाती है। उनके हर कदम को लालू यादव के राजनीतिक स्टाइल से जोड़कर देखा जाता है। बिहार की राजनीति में जहां लालू का नाम एक ब्रांड बन चुका है, वहीं तेजस्वी को अभी भी खुद को साबित करना बाकी है।
आरजेडी के नए चेहरे के रूप में तेजस्वी ने पार्टी की कमान संभाली है। उन्होंने युवाओं को जोड़ने और मुद्दों पर खुलकर बात करने की कोशिश की है। लेकिन, सवाल वही है – क्या वे कभी ‘लालू के बेटे’ की पहचान से आगे बढ़कर अपनी अलग पहचान बना पाएंगे? बिहार में जहां जातीय समीकरण और परिवारवाद की राजनीति गहरी जड़ें जमाए हुए हैं, वहां तेजस्वी के लिए यह रास्ता और भी मुश्किल हो जाता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में तेजस्वी यादव इस चुनौती का सामना कैसे करते हैं। क्या वे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए भी अपनी एक नई लकीर खींच पाएंगे? या फिर हमेशा लालू की परछाई में ही रहेंगे?






