
Breaking Today, Digital Desk : आजकल की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में, अक्सर कपल्स करियर बनाने या ज़िंदगी को थोड़ा और एक्सप्लोर करने के चक्कर में शादी और बच्चे प्लान करने में देर कर देते हैं। पहले जहां 20-25 की उम्र में लोग माता-पिता बन जाते थे, वहीं अब 35 या उससे ज़्यादा की उम्र में पैरेंट्स बनने का चलन बढ़ रहा है। लेकिन, इस उम्र में बच्चे कंसीव करने में कुछ चुनौतियाँ भी आती हैं, और यहीं पर इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) जैसी तकनीकें उम्मीद की किरण बनकर सामने आती हैं।
देर से पैरेंट्स बनने के पीछे क्या हैं वजहें?
कई कारण हैं जिनकी वजह से कपल्स अब देर से बच्चे प्लान कर रहे हैं:
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करियर की प्राथमिकता: आजकल लड़के और लड़कियां दोनों ही अपने करियर को लेकर बहुत गंभीर हैं। वे चाहते हैं कि पहले वे आर्थिक रूप से मज़बूत हों और अपने सपनों को पूरा करें, फिर परिवार आगे बढ़ाएं।
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आर्थिक स्थिरता: बच्चों की परवरिश में काफी खर्च आता है। इसलिए, कई कपल्स पहले अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना चाहते हैं ताकि वे अपने बच्चे को एक अच्छी ज़िंदगी दे सकें।
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जीवनशैली में बदलाव: आज के दौर में लोग अपनी ज़िंदगी को पूरी तरह जीना चाहते हैं। वे ट्रैवल करते हैं, नए अनुभव लेते हैं, और खुद को और ज़्यादा जानने की कोशिश करते हैं। बच्चे की ज़िम्मेदारी लेने से पहले वे इन सब चीज़ों का लुत्फ़ उठाना चाहते हैं।
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शिक्षा और जागरूकता: लोग अब प्रजनन स्वास्थ्य (reproductive health) के बारे में ज़्यादा जागरूक हैं। उन्हें पता है कि अगर उन्हें कंसीव करने में दिक्कत आती है तो आईवीएफ जैसे विकल्प मौजूद हैं।
35 के बाद क्या आती हैं चुनौतियाँ?
महिलाओं में 35 की उम्र के बाद फर्टिलिटी थोड़ी कम होने लगती है। अंडों की गुणवत्ता (egg quality) और संख्या में गिरावट आ सकती है, जिससे गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है। पुरुषों में भी स्पर्म काउंट और गुणवत्ता पर उम्र का असर पड़ सकता है। ऐसे में कई कपल्स को स्वाभाविक रूप से गर्भधारण करने में परेशानी होती है।
IVF: एक उम्मीद की नई किरण
जब स्वाभाविक रूप से गर्भधारण नहीं हो पाता, तब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) एक बहुत ही प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आता है। आईवीएफ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अंडे और स्पर्म को शरीर के बाहर, लैब में मिलाया जाता है, और फिर बने हुए भ्रूण (embryo) को महिला के गर्भाशय में वापस डाल दिया जाता है।
पिछले कुछ सालों में, 35 से ऊपर के कपल्स में आईवीएफ की मांग काफी बढ़ी है। इसकी वजह यह है कि मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि आईवीएफ की सफलता दर में काफी सुधार हुआ है। यह उन कपल्स के लिए एक बड़ा सहारा बन गया है जो पैरेंट्स बनने की चाह रखते हैं लेकिन उम्र या अन्य फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।
देर से पैरेंट्स बनना अब एक आम बात हो गई है। करियर, आर्थिक स्थिरता और जीवनशैली में बदलाव जैसे कई कारक इसके पीछे हैं। भले ही 35 के बाद गर्भधारण करने में कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन आईवीएफ जैसी आधुनिक तकनीकें इन कपल्स को माता-पिता बनने का सुख प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अगर आप भी इस स्थिति में हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेने में बिल्कुल भी देर न करें।






