
Breaking Today, Digital Desk : क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष में भी वीजा की ज़रूरत पड़ सकती है? सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन असल में ऐसा हुआ है। नासा, जो दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी है, उसने कुछ चीनी नागरिकों को अपने कार्यक्रमों और सुविधाओं से दूर रखा है। ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं, बल्कि एक ऐसा फैसला है जिस पर काफी बहस भी हुई है।
दरअसल, नासा ने ऐसा ‘वुल्फ अमेंडमेंट’ नाम के एक कानून के तहत किया है। ये कानून 2011 में अमेरिका में पास हुआ था। इसका सीधा मतलब ये है कि नासा चीनी सरकार से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संगठन के साथ सहयोग नहीं कर सकता, खासकर अगर इसमें अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई पहलू शामिल हो। सीधी बात करें तो, अमेरिका को ये डर है कि अगर चीनी वैज्ञानिकों को नासा की संवेदनशील तकनीक और जानकारी तक पहुँच मिलती है, तो उसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।
इसकी वजह से कई बार ऐसा हुआ है कि चीनी वैज्ञानिक या शोधकर्ता, जो किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन या वैज्ञानिक बैठक में हिस्सा लेने वाले थे और वो नासा की किसी सुविधा में होनी थी, उन्हें वहाँ जाने की इजाजत नहीं मिली। ये उन चीनी नागरिकों पर लागू होता है जिनका सीधा संबंध चीनी सरकार या सेना से हो सकता है।
अब आप सोचेंगे कि क्या ये सही है? विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान तो पूरी दुनिया के लिए है, इसमें देशों के बीच भेदभाव क्यों? इस पर अलग-अलग राय है। कुछ लोग मानते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण है और हर देश को अपनी सुरक्षा के लिए ऐसे कदम उठाने का हक है। वहीं, कुछ लोग इसे विज्ञान और मानवाधिकारों के खिलाफ मानते हैं, उनका कहना है कि ज्ञान को किसी सीमा में नहीं बांधना चाहिए।
इस पूरे मामले का एक और पहलू है – अंतरिक्ष में बढ़ती प्रतिस्पर्धा। अमेरिका और चीन दोनों ही अंतरिक्ष के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। चीन ने अपना खुद का स्पेस स्टेशन बना लिया है और चंद्रमा पर भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। ऐसे में, ये प्रतिबंध कहीं न कहीं इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा का भी नतीजा लगता है।
अंतरिक्ष में भी देशों के बीच की दूरियां और राजनीति दिख रही है। ये एक जटिल मुद्दा है, जहाँ विज्ञान, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंध सब आपस में जुड़े हुए हैं। भविष्य में देखना होगा कि क्या ये नियम बदलते हैं या फिर अंतरिक्ष भी ज़मीन की तरह ही सीमाओं में बँधा रहेगा।




