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दिल्ली की सड़कों पर जलभराव, सियासत में आया उबाल, आप और भाजपा में छिड़ी जुबानी जंग…

Waterlogging on Delhi's roads, politics heats up, verbal war breaks out between AAP and BJP...

Breaking Today, Digital Desk : लगातार हो रही भारी बारिश के कारण दिल्ली की सड़कें एक बार फिर दरिया बन गई हैं, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जगह-जगह जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी की इस पुरानी समस्या को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। दोनों ही दल एक-दूसरे को इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

आम आदमी पार्टी ने, जो हाल तक दिल्ली की सत्ता में थी, मौजूदा भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। ‘आप’ नेताओं ने शहर के विभिन्न जलमग्न इलाकों की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए monsoon की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि नालों की डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) के नाम पर करोड़ों का घोटाला हुआ है और सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है। ‘आप’ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने इसे “आपराधिक लापरवाही” करार देते हुए कई हादसों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। ‘आप’ ने भाजपा की “फोर-इंजन सरकार” पर तंज कसते हुए कहा है कि एमसीडी, दिल्ली सरकार, केंद्र और उपराज्यपाल के नियंत्रण के बावजूद शहर की हालत बदतर हो गई है।

इन आरोपों का जवाब भाजपा ने भी उतनी ही आक्रामकता से दिया है। भाजपा नेताओं ने दिल्ली की मौजूदा दुर्दशा के लिए आम आदमी पार्टी के पिछले 12 वर्षों के शासन को दोषी ठहराया है। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने ‘आप’ पर पलटवार करते हुए कहा, “12 साल तक आपने दिल्ली को लूटा और बर्बाद किया, और अब आप दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं।” भाजपा का तर्क है कि दशकों की लापरवाही और भ्रष्टाचार को कुछ ही महीनों में ठीक नहीं किया जा सकता। सत्ताधारी दल का कहना है कि उनकी सरकार जलभराव की समस्या से निपटने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन पिछली सरकार से मिली अव्यवस्था को सुधारने में समय लगेगा।

यह राजनीतिक खींचतान हर साल मानसून में दिल्ली की सड़कों पर देखने को मिलती है, लेकिन इसका स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है। पार्टियां बदल जाती हैं, आरोप-प्रत्यारोप के चेहरे बदल जाते हैं, लेकिन दिल्ली वालों के लिए जलभराव की समस्या जस की तस बनी रहती है। हर बार की तरह इस बार भी सियासत के इस शोर में आम नागरिक की आवाज कहीं दब कर रह गई है, जो इस जलभराव से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है।

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