
Breaking Today, Digital Desk : बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव सिर्फ एक राज्य की सरकार चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए बिहार की चुनावी बिसात केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी रणनीतिक चाल है जो दिल्ली की सियासत और राष्ट्रपति भवन तक के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
भाजपा के लिए बिहार में जीत हासिल करना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह न केवल विपक्ष के मनोबल को प्रभावित करेगा, बल्कि भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर पकड़ को भी मजबूत करेगा। बिहार को अक्सर विपक्षी गठबंधन की धुरी के तौर पर देखा जाता है, और यहां की जीत या हार राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
क्या है बिहार चुनाव का राष्ट्रपति कनेक्शन?
भारत में राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्यों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (विधायक) भी शामिल होते हैं। हर विधायक के वोट का अपना एक मूल्य होता है, जो राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करता है। ऐसे में बिहार जैसे बड़े राज्य में जीत हासिल करने वाली पार्टी के पास राष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत बढ़त होती है।
यदि भाजपा 2025 में बिहार में शानदार जीत हासिल करती है, तो उसके विधायकों की संख्या में इजाफा होगा। यह इजाफा 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार के लिए एक ठोस आधार तैयार करेगा। ज्यादा विधायकों का मतलब है राष्ट्रपति चुनाव में ज्यादा वोटों का मूल्य, जो अपनी पसंद के उम्मीदवार को राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
राज्यसभा का गणित और भाजपा की रणनीति
बिहार चुनाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू राज्यसभा में सीटों का समीकरण है। राज्य विधानसभा के सदस्य ही राज्यसभा के सांसदों का चुनाव करते हैं। वर्तमान में, लोकसभा में मजबूत बहुमत होने के बावजूद, भाजपा कई बार राज्यसभा में संख्या बल की कमी के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में चुनौतियों का सामना करती है। बिहार में जीत से न केवल विधानसभा में ताकत बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में राज्यसभा में भी भाजपा की सीटें बढ़ेंगी, जिससे पार्टी के लिए अपनी विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान हो जाएगा।
हाल के वर्षों में, भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है और अब उसकी नजर निचले तबके के वोटरों पर भी है। राजनीतिक विशेषज्ञ संदीप शास्त्री की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 37% गरीब मतदाताओं ने वोट दिया, जो 2014 में केवल 24% था। यह आंकड़ा बताता है कि भाजपा अब अपनी पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़कर एक बड़े सामाजिक आधार को साधने की कोशिश कर रही है, और बिहार इस रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला है।
इसके साथ ही, भाजपा बिहार में किसी भी तरह की बगावत को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है और हर सीट के लिए एक विस्तृत रणनीति बना रही है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि 2025 के चुनाव में कोई भी कसर न रह जाए, क्योंकि यहां की जीत 2027 के बड़े सियासी खेल के लिए एक मजबूत नींव का पत्थर साबित होगी।






