रक्षा बंधन 2025, एक त्यौहार, हज़ार रंग – जानें भारत की अनूठी परंपराएं…
Raksha Bandhan 2025, One festival, thousand colours – Know the unique traditions of India

Breaking Today, Digital Desk : रक्षा बंधन, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक, सिर्फ एक धागे का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विविधताओं का एक खूबसूरत संगम है। पूरे भारत में इस त्यौहार को मनाने के तरीके इतने अनूठे और निराले हैं कि वे इसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा देते हैं। जहाँ उत्तर भारत में यह त्यौहार पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाता है, वहीं देश के अन्य हिस्सों में इसके स्वरूप में एक मनमोहक बदलाव देखने को मिलता है। तो चलिए, 2025 के रक्षा बंधन के अवसर पर भारत की इन अनोखी परंपराओं की दुनिया में झाँकते हैं।
पश्चिम भारत: जहाँ समुद्र देवता और रिश्तों का होता है संगम
महाराष्ट्र और गुजरात जैसे पश्चिमी राज्यों में रक्षा बंधन का दिन ‘नारियल पूर्णिमा’ के साथ आता है। यहाँ की कोली (मछुआरा) समुदाय के लोग समुद्र देवता वरुण को नारियल अर्पित कर अपनी नावों की सुरक्षा और अच्छी मछली की पैदावार के लिए प्रार्थना करते हैं। इसके साथ ही बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, जिससे यह त्यौहार पारिवारिक और व्यावसायिक आशीर्वाद का एक अनूठा मिश्रण बन जाता है।
वहीं राजस्थान में ‘लुंबा राखी’ की एक खास परंपरा है जो इस त्यौहार को और भी खास बनाती है। यहाँ बहनें अपने भाई के साथ-साथ अपनी भाभी (भाई की पत्नी) की चूड़ी पर भी एक खूबसूरत राखी बांधती हैं, जिसे ‘लुंबा’ कहा जाता है। यह प्रथा भाभी को परिवार का एक अभिन्न अंग मानने और उनके प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त करने का एक सुंदर तरीका है।
पूर्वी भारत: भक्ति और प्रकृति से जुड़ा पर्व
पश्चिम बंगाल और ओडिशा में रक्षा बंधन ‘झूलन पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान कृष्ण और राधा के दिव्य प्रेम को समर्पित है। इस दिन मंदिरों में झूले सजाए जाते हैं और भगवान कृष्ण-राधा की मूर्तियों को झुलाया जाता है। बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं, और साथ ही भगवान से भी परिवार की रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं।
ओडिशा में इस दिन को ‘गम्हा पूर्णिमा’ भी कहा जाता है, जो खेती और पशुधन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन किसान अपने हल और गाय-बैलों की पूजा करते हैं और उनकी रक्षा के लिए उन्हें राखी भी बांधते हैं। यह प्रकृति और इंसानी रिश्तों के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है।
दक्षिण भारत: जहाँ रक्षा सूत्र का है आध्यात्मिक महत्व
दक्षिण भारत में, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय के बीच, इस दिन को ‘अवनी अवित्तम’ या ‘उपाकर्म’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धिकरण और वैदिक ज्ञान के नवीनीकरण का प्रतीक है। पुरुष इस दिन स्नान आदि के बाद अपना पवित्र जनेऊ (यज्ञोपवीत) बदलते हैं और वेदों का पाठ करते हैं। हालाँकि यहाँ राखी बांधने की परंपरा उतनी प्रचलित नहीं है, फिर भी शहरी क्षेत्रों में अब परिवार इस त्यौहार को मनाने लगे हैं।
उत्तर भारत: पतंगों और पारंपरिक उल्लास का मेल
उत्तर भारत के कई हिस्सों, जैसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में रक्षा बंधन का त्यौहार पारंपरिक धूमधाम से मनाया जाता है। बहनें आरती, तिलक और मिठाई के साथ अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। इस क्षेत्र की एक और खास बात है पतंगबाजी। रक्षा बंधन और जन्माष्टमी के आसपास आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, जो इस त्यौहार के उल्लास को और बढ़ा देता है।
यह त्यौहार सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब दोस्त, और यहाँ तक कि सैनिक और पुलिसकर्मी भी एक-दूसरे को राखी बांधकर सुरक्षा और एकता की भावना का जश्न मनाते हैं। यह त्यौहार वास्तव में भारत की ‘अनेकता में एकता’ की भावना का एक जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ हर क्षेत्र की अपनी अलग परंपरा होते हुए भी मूल भावना एक ही है – प्यार, सुरक्षा और अपनेपन का अटूट बंधन।






