
Breaking Today, Digital Desk : वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को लेकर चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग ने अपनी बात रखी है। आयोग का कहना है कि अगर राजनीतिक दलों ने सही समय पर यानी दावे और आपत्तियों के दौरान ही इन खामियों को उठाया होता, तो इन्हें आसानी से ठीक किया जा सकता था।
चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होती है और इसमें हर कदम पर राजनीतिक दलों को शामिल किया जाता है। आयोग के मुताबिक, मसौदा सूची सभी पार्टियों के साथ साझा की जाती है ताकि वे इसकी जांच कर सकें और अगर कोई गड़बड़ी है तो उस पर आपत्ति जता सकें।
आयोग ने एक बयान जारी कर कहा, “हाल ही में, कुछ राजनीतिक दल और व्यक्ति पिछली मतदाता सूचियों में भी गलतियों के मुद्दे उठा रहे हैं।” बयान में आगे कहा गया कि इन मुद्दों को उठाने का सही समय दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान था। अगर उस समय इन गड़बड़ियों को सामने लाया जाता, तो संबंधित अधिकारी चुनाव से पहले ही उन्हें सुधार सकते थे।
आयोग ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ राजनीतिक दलों और उनके बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) ने उचित समय पर मतदाता सूची की जांच ही नहीं की। चुनाव आयोग ने साफ किया कि वह मतदाता सूचियों की जांच का स्वागत करता है, क्योंकि इससे अधिकारियों को गलतियों को सुधारने और सूची को सटीक बनाए रखने में मदद मिलती है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष की ओर से “वोट चोरी” और मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि राजनीतिक दलों को प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए था।






