Sliderराजनीति

कर्नाटक कांग्रेस में डीके शिवकुमार का नया दांव, क्या पार्टी अपना रही है संघ की रणनीति…

DK Shivkumar's new move in Karnataka Congress, is the party adopting the strategy of Sangh

Breaking Today, Digital Desk : कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की हालिया गतिविधियों ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। उनके नेतृत्व में पार्टी न केवल चुनावी जीत हासिल कर रही है, बल्कि अपनी कार्यशैली और विचारधारा में भी सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलावों से गुज़र रही है। राजनीतिक विश्लेषक इन बदलावों को “आरएसएस-शैली” की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं, जिसमें ज़मीनी स्तर पर पकड़, अनुशासित संगठन और विचारधारा के स्तर पर लचीलापन शामिल है।

संगठनात्मक अनुशासन और ज़मीनी पकड़

डीके शिवकुमार ने कर्नाटक कांग्रेस में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। उनकी कार्यशैली की तुलना अक्सर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संगठनात्मक कौशल से की जाती है। जिस तरह संघ अपने कैडर को अनुशासित रखता है और ज़मीनी स्तर पर लगातार सक्रिय रहता है, उसी तरह शिवकुमार ने भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और बूथ स्तर पर पार्टी को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया है। उनकी इस “हाथ की सफाई” का ही नतीजा था कि कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की।

विचारधारा में लचीलापन: नरम हिंदुत्व की ओर झुकाव?

डीके शिवकुमार अपनी धार्मिक पहचान को लेकर कभी भी असहज नहीं रहे हैं। उनका मंदिरों में जाना, महाशिवरात्रि जैसे धार्मिक आयोजनों में शामिल होना और साधु-संतों से मेल-मिलाप, ये सब उनकी राजनीतिक शैली का हिस्सा रहा है। हालांकि, उनके इन क़दमों की पार्टी के भीतर ही कुछ नेताओं ने आलोचना की है। उनका मानना है कि यह कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के खिलाफ है और भाजपा और संघ की नकल करने जैसा है।

एक ओर जहां राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य बड़े नेता लगातार आरएसएस की विचारधारा पर हमलावर रहते हैं, वहीं शिवकुमार का यह रुख पार्टी के भीतर एक नए तरह के मंथन का संकेत देता है। उनके समर्थक इसे समय की ज़रूरत बताते हैं। उनका तर्क है कि भाजपा के हिंदुत्व के नैरेटिव का मुक़ाबला करने के लिए कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव लाना होगा।

अंदरूनी खींचतान और भविष्य की राह

हालांकि, शिवकुमार की इस नई शैली को लेकर पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उनके बीच सत्ता को लेकर खींचतान की ख़बरें भी समय-समय पर सामने आती रहती हैं। कुछ नेताओं को यह भी डर है कि शिवकुमार की कार्यशैली से पार्टी की मूल विचारधारा कमज़ोर पड़ सकती है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि डीके शिवकुमार का यह “आरएसएस-शैली” का प्रयोग कर्नाटक कांग्रेस को भविष्य में कितना मज़बूत बनाता है। क्या यह एक सफल मॉडल बनकर उभरेगा, जिसे अन्य राज्यों में भी अपनाया जाएगा? या फिर यह पार्टी के भीतर की गुटबाज़ी को और बढ़ाएगा? इन सवालों का जवाब तो वक़्त ही देगा, लेकिन इतना तो तय है कि डीके शिवकुमार ने कर्नाटक की राजनीति में एक नई और दिलचस्प बहस को जन्म दे दिया है।

Related Articles

Back to top button