महिला सशक्तिकरण की ओर बड़ा कदम, पति की नो एंट्री…
A big step towards women empowerment, no entry for husband...

Breaking Today, Digital Desk : अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब कोई महिला पार्षद, प्रधान या जिला पंचायत सदस्य बनती है, तो उसकी जगह उसका पति ही सारा काम देखता है। बैठकों में भी पति ही हाज़िर रहता है और सारे फ़ैसले भी वही लेता है। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा! सरकार ने इस पर सख़्ती दिखाते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं कि अब पत्नी की जगह पति की ‘नो एंट्री’ होगी।
यानी, अगर कोई महिला चुनाव जीतती है तो उसे ही अपने सारे अधिकार और कर्तव्य निभाने होंगे। उसका पति या कोई और रिश्तेदार उसकी जगह काम नहीं कर पाएगा। ये नियम इसलिए बनाया गया है ताकि महिला जनप्रतिनिधि सही मायने में सशक्त हो सकें और खुद फ़ैसले ले सकें। ये एक बहुत अच्छा कदम है महिला सशक्तिकरण की दिशा में, जिससे ज़मीनी स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा। अब महिलाओं को पूरा मौक़ा मिलेगा अपना काम ख़ुद करने का और लोगों की सेवा करने का।






