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फैटी लिवर सिर्फ बड़ों की बीमारी नहीं, बच्चों में भी बढ़ रहे हैं मामले…

Fatty liver is not just a disease of adults, cases are increasing in children too...

Breaking Today, Digital Desk : अक्सर हम सोचते हैं कि फैटी लिवर जैसी बीमारियां सिर्फ बड़े लोगों को होती हैं, खासकर उन्हें जिनकी जीवनशैली ठीक नहीं होती। लेकिन यह धारणा अब बदल रही है, और यह चिंताजनक है। आजकल बच्चों में भी फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और यह एक ऐसी समस्या है जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

सोचिए, पहले जहां बच्चों में यह बीमारी बहुत कम देखने को मिलती थी, वहीं अब डॉक्टर और विशेषज्ञ लगातार इसके बढ़ते मामलों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। यह सिर्फ भारत की बात नहीं है, दुनिया भर में बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका असर दिख रहा है।

बच्चों में फैटी लिवर क्यों बढ़ रहा है?

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ा culprit हमारी बदलती जीवनशैली है।

  • गलत खान-पान: आजकल बच्चे घर के खाने से ज्यादा जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, और मीठे पेय पसंद करते हैं। इनमें फैट और शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो लिवर पर अतिरिक्त बोझ डालती है।

  • शारीरिक गतिविधियों की कमी: पहले बच्चे घंटों बाहर खेलते थे, कूदते थे। अब उनका ज्यादातर समय मोबाइल, टैबलेट या टीवी के सामने बीतता है। शारीरिक गतिविधि न होने से कैलोरी बर्न नहीं होती और फैट जमा होने लगता है।

  • मोटापा: बच्चों में बढ़ता मोटापा फैटी लिवर का एक प्रमुख कारण है। जब शरीर में फैट जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह लिवर में भी जमा होने लगता है।

क्या हैं इसके लक्षण?

बच्चों में फैटी लिवर के लक्षण शुरुआती दौर में पहचानना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि अक्सर कोई खास तकलीफ नहीं होती। लेकिन कुछ बातों पर ध्यान दिया जा सकता है:

  • पेट में दर्द या असहजता

  • थकान या सुस्ती

  • वजन बढ़ना

  • कभी-कभी त्वचा का पीला पड़ना (यह गंभीर स्थिति में होता है)

अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, यहां तक कि लिवर सिरोसिस जैसी खतरनाक बीमारी का कारण भी बन सकता है।

हम क्या कर सकते हैं?

अच्छी खबर यह है कि बच्चों में फैटी लिवर को रोका और ठीक किया जा सकता है। हमें कुछ कदम उठाने होंगे:

  • स्वस्थ आहार: बच्चों को हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर आहार दें। जंक फूड और मीठे पेय से दूरी बनाएं।

  • शारीरिक गतिविधि: बच्चों को रोजाना कम से कम 60 मिनट खेलने या कोई शारीरिक गतिविधि करने के लिए प्रोत्साहित करें।

  • नियमित जांच: अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे को यह समस्या हो सकती है, तो डॉक्टर से सलाह लें और नियमित जांच कराएं।

  • स्क्रीन टाइम कम करें: मोबाइल और टीवी पर बिताने वाले समय को नियंत्रित करें।

याद रखें, हमारे बच्चों का स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी है। आइए मिलकर इस बढ़ती हुई समस्या पर ध्यान दें और उन्हें एक स्वस्थ भविष्य दें।

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