
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया, जिसने सबको चौंका दिया। यह मामला था एक रूसी महिला और उसके भारतीय पति के बीच अपने बच्चे की कस्टडी को लेकर। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा बयान दिया, जो सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि कूटनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वे ऐसे कोई आदेश पारित नहीं करना चाहते, जिससे भारत और रूस के बीच के मजबूत संबंध प्रभावित हों।
दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ जब बच्चे के माता-पिता के बीच तलाक हो गया। रूसी मां बच्चे को अपने साथ रूस ले जाना चाहती थी, जबकि भारतीय पिता बच्चे की कस्टडी भारत में ही चाहता था। निचली अदालत और हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बच्चे का भविष्य और उसकी भलाई सबसे ऊपर है। लेकिन साथ ही, उन्होंने एक महत्वपूर्ण पहलू पर भी ध्यान दिलाया – भारत और रूस के बीच के ऐतिहासिक और गहरे संबंध।
बेंच ने कहा, “हम ऐसे किसी आदेश को पारित करने से बचना चाहेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच के राजनयिक संबंधों पर नकारात्मक असर पड़े। भारत और रूस के संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और हम नहीं चाहते कि एक व्यक्तिगत मामले की वजह से इन पर कोई आंच आए।”
कोर्ट ने आगे यह भी संकेत दिया कि वे इस मामले में एक ऐसा समाधान चाहते हैं, जो बच्चे के लिए सबसे अच्छा हो और साथ ही दोनों देशों के बीच के सौहार्दपूर्ण रिश्तों को भी बनाए रखे। इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट इस पर और विस्तार से विचार करेगा।
यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मामले में क्या फैसला सुनाता है, जो बच्चे के भविष्य, माता-पिता के अधिकारों और भारत-रूस के राजनयिक संबंधों – इन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखता है।




