21वीं सदी के भारत की मेहनत पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत की क्या है खुबियाँ


भारत ने 2 सितंबर 2022 को अपना पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत भारतीय नौसेना में शामिल किया। यह न केवल एक युद्धपोत है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “21वीं सदी के भारत की मेहनत, कौशल, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण” बताया । कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में निर्मित, यह पोत भारत के प्रमुख उद्योगों और 100 से अधिक एमएसएमई द्वारा आपूर्ति की गई स्वदेशी सामग्री से बना है । 262 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा और 59 मीटर ऊँचा, यह भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा युद्धपोत है। इसमें 2,300 से अधिक कम्पार्टमेंट्स हैं और लगभग 1,700 कर्मियों के लिए आवास की सुविधा है। यह 28 नॉट्स की अधिकतम गति और 7,500 नॉटिकल मील की सहनशक्ति प्रदान करता है। MiG-29K लड़ाकू विमान, स्वदेशी ALH हेलीकॉप्टर और अन्य विमान संचालन की क्षमता रखता है । पोत में उत्पन्न ऊर्जा लगभग 5,000 घरों की बिजली आपूर्ति के बराबर है आईएनएस विक्रांत भारत को उन देशों की श्रेणी में शामिल करता है जो स्वदेशी विमानवाहक पोत डिजाइन और निर्माण करने में सक्षम हैं ।यह पोत भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने और चीन की बढ़ती समुद्री शक्ति का मुकाबला करने में सक्षम बनाता है ।आईएनएस विक्रांत के साथ भारतीय नौसेना ने अपने ध्वज में बदलाव किया, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रतीक को शामिल किया गया, जिससे औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति का संकेत मिलता है ।विक्रांत में महिला अधिकारियों के लिए विशेष आवास सुविधाएँ प्रदान की गई हैं, जो भारतीय नौसेना में लिंग समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है । आईएनएस विक्रांत न केवल एक युद्धपोत है, बल्कि यह भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह पोत भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




