
Breaking Today, Digital Desk : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपनी नींद से समझौता कर लेते हैं। देर रात तक काम करना, सोशल मीडिया पर समय बिताना या मनोरंजन के लिए जागना आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत आपको एक गंभीर और जानलेवा स्थिति, स्ट्रोक, के करीब ले जा सकती है? हाल के अध्ययनों और न्यूरोलॉजिस्ट की राय इस बात की पुष्टि करती है कि नींद की कमी और स्ट्रोक के बीच एक गहरा और सीधा संबंध है।
नींद की कमी कैसे बनती है स्ट्रोक का कारण?
वरिष्ठ न्यूरो सर्जनों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो उसके शरीर पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। नींद की कमी से शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जिससे सूजन (inflammation) की स्थिति पैदा हो सकती है। यह सूजन उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और अंततः स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाती है। अपर्याप्त नींद से हृदय गति और रक्तचाप भी बढ़ता है, जो स्ट्रोक के लिए प्रमुख जोखिम कारक हैं।
सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. राजेश आचार्य ने बताया कि उनके पास ऐसे कई ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आते हैं, जिनकी हिस्ट्री में नींद न आने की समस्या पाई गई। वह बताते हैं कि लोग अक्सर नींद न आने की समस्या को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो धीरे-धीरे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का कारण बनती है और अंत में स्ट्रोक के रूप में सामने आती है।
कितनी नींद है ज़रूरी?
अध्ययनों से पता चलता है कि न केवल कम नींद, बल्कि बहुत अधिक नींद भी स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, वयस्कों को हर रात सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए। जो लोग पांच घंटे से कम या नौ घंटे से ज़्यादा सोते हैं, उनमें स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग रात में पांच घंटे से कम सोते हैं, उनमें स्ट्रोक का खतरा सात घंटे सोने वालों की तुलना में तीन गुना अधिक होता है।
स्लीप डिसऑर्डर और स्ट्रोक का संबंध
स्लीप एपनिया जैसे नींद संबंधी विकार स्ट्रोक के लिए एक बड़ा खतरा हैं। स्लीप एपनिया में, नींद के दौरान व्यक्ति की सांस बार-बार रुकती और चलती है, जिससे मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है। यह स्थिति मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है। खर्राटे लेना, हांफना, और नींद के दौरान सांस रुकना जैसे लक्षण स्लीप एपनिया का संकेत हो सकते हैं और इन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
अच्छी नींद के लिए क्या करें?
न्यूरोलॉजिस्ट और नींद विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में कुछ साधारण बदलाव करके नींद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है और स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है।
सोने और जागने का एक नियमित समय बनाएं: हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
सोने का माहौल बनाएं: सुनिश्चित करें कि आपका कमरा शांत, अंधेरा और ठंडा हो।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से दूरी: सोने से कम से कम एक-दो घंटे पहले मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल बंद कर दें।
कैफीन और भारी भोजन से बचें: देर शाम चाय, कॉफी या भारी भोजन करने से बचें।
नियमित व्यायाम करें: शारीरिक गतिविधि अच्छी नींद में मदद करती है, लेकिन सोने से ठीक पहले तीव्र व्यायाम न करें।
तनाव प्रबंधन: तनाव कम करने के लिए ध्यान, गहरी सांस लेने के व्यायाम या योग का सहारा लें।
यदि आपको लगातार नींद न आने, दिन में बहुत ज़्यादा नींद आने या स्लीप एपनिया के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। नींद को प्राथमिकता देना आपके मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है, जो आपको स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है।






