
Breaking Today, Digital Desk : पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित उनके स्मारक ‘सदैव अटल’ पर पुष्पांजलि अर्पित की और राष्ट्र निर्माण में उनके द्वारा देखे गए आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अटल जी का जीवन और उनके विचार करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा, “अटल जी को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए, भारत की सर्वांगीण प्रगति के प्रति उनका समर्पण और सेवा भावना हम सभी को एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करती रहेगी।” यह केवल एक औपचारिक स्मरणोत्सव नहीं था, बल्कि उस दूरगामी दृष्टिकोण का सम्मान था जिसने भारत को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अटल बिहारी वाजपेयी का आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण केवल एक नारा नहीं था, बल्कि सुशासन और दूरदर्शी नीतियों का एक खाका था। उनके कार्यकाल में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण ने जहाँ एक ओर भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को दुनिया के सामने स्थापित किया, वहीं स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी परियोजनाओं ने देश के आर्थिक एकीकरण और ढांचागत विकास की नींव रखी। इन्हीं कदमों ने एक ऐसे भारत की कल्पना को साकार करने का मार्ग प्रशस्त किया जो अपनी क्षमताओं पर विश्वास करता है और वैश्विक मंच पर एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़ा होता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान सरकार अटल जी के दिखाए रास्ते पर ही चल रही है। आज का ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान उन्हीं की नीतियों का विस्तार है, जिसका उद्देश्य भारत को हर क्षेत्र में सक्षम और सशक्त बनाना है, चाहे वह रक्षा हो, प्रौद्योगिकी हो या विनिर्माण। मोदी ने कहा कि भारत की प्रगति और विकास को गति देने में अटल जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके नेतृत्व से देश को बहुत लाभ हुआ।
आज ‘सदैव अटल’ स्मारक पर केवल प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न दलों के नेताओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जो अटल जी के प्रति पक्ष-विपक्ष से परे सम्मान को दर्शाता है। उनकी कविताएं और भाषण आज भी प्रासंगिक हैं और राजनेताओं की पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं। उनका सपना एक ऐसे मजबूत और समृद्ध भारत का निर्माण करना था, जिसे साकार करने के लिए आज देश एकजुट होकर प्रयास कर रहा है।




