
Breaking Today, Digital Desk : इस साल स्वतंत्रता दिवस का जश्न सिर्फ़ तिरंगे, परेड और देशभक्ति के गीतों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बहस का एक नया अखाड़ा भी बन गया। मुद्दा था – खाने की आज़ादी का। देश के कई नगर निगमों ने 15 अगस्त को मांस की दुकानें और बूचड़खाने बंद रखने का आदेश जारी किया, जिस पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि यह आदेश नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है और यह तय करना सरकार का काम नहीं है कि लोग क्या खाएँ और क्या नहीं।
यह विवाद तब और गहरा हो गया जब विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने इस आदेश के विरोध में 15 अगस्त को ‘मटन पार्टी’ आयोजित करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा, “जिस दिन हमें आज़ादी मिली, उसी दिन आप हमसे हमारी पसंद का खाना खाने की आज़ादी छीन रहे हैं।” शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए इसे लोगों के खान-पान की आदतों में दखलंदाज़ी बताया।
वहीं, हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस आदेश को “संवेदनहीन और असंवैधानिक” करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि मांस खाने का स्वतंत्रता दिवस मनाने से क्या संबंध है? ओवैसी ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध लोगों की आजीविका, निजता और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
दूसरी ओर, कुछ नगर निगमों और सत्ता पक्ष के नेताओं ने इस फैसले का बचाव किया है। उनका तर्क है कि यह कोई नया आदेश नहीं है और राष्ट्रीय पर्वों पर इस तरह की पाबंदी लंबे समय से चली आ रही है। कुछ भाजपा नेताओं ने 1988 के एक सरकारी आदेश का हवाला दिया, जो नगर निगमों को ऐसे अवसरों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है। उनका यह भी कहना है कि अगर लोग एक दिन मांस नहीं खाते हैं तो इससे कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
यह बहस सिर्फ़ राजनीतिक गलियारों तक ही सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर बँटे हुए नज़र आ रहे हैं। एक पक्ष इसे सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे देश की अनेकतावादी संस्कृति पर चोट मान रहा है। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सरकारी नियमों के बीच की रेखा कहाँ खींची जानी चाहिए, खासकर जब बात राष्ट्रीय पर्वों की हो।






