
Breaking Today, Digital Desk : जम्मू-कश्मीर में ईद-ए-मिलाद की छुट्टी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली अब्दुल्ला सरकार ने उपराज्यपाल (एलजी) प्रशासन पर लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला तब गरमाया जब कुछ संगठनों ने दावा किया कि इस साल ईद-ए-मिलाद की छुट्टी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, और इसे जानबूझकर रद्द करने की कोशिश की जा रही है।
हर साल ईद-ए-मिलाद के मौके पर जम्मू-कश्मीर में सरकारी छुट्टी रहती है। यह दिन पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और घाटी में इसका विशेष महत्व है। लेकिन इस साल कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि एलजी प्रशासन ने छुट्टी को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो गया। कुछ लोग यह भी दावा करने लगे कि प्रशासन ने इसे रद्द कर दिया है।
इस खबर के फैलते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गई। उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तत्काल इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
अब्दुल्ला सरकार का आरोप: ‘एलजी लोगों की भावनाओं से खेल रहे हैं’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने एलजी प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की एक जानबूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है जिससे जम्मू-कश्मीर के लोगों में गुस्सा और असंतोष पैदा हो।
एक बयान में, पार्टी के प्रवक्ता ने कहा, “ईद-ए-मिलाद की छुट्टी को लेकर पैदा किया गया यह भ्रम अस्वीकार्य है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि एलजी प्रशासन जम्मू-कश्मीर के लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कितना कम समझता है। यह लोगों की भावनाओं से खेलने के अलावा और कुछ नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जो शांति और सद्भाव को बिगाड़ सकें।
एलजी प्रशासन का पक्ष
हालांकि, एलजी प्रशासन की तरफ से इस विवाद पर अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन जल्द ही इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी करेगा ताकि लोगों में फैला भ्रम दूर हो सके।
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है। जम्मू-कश्मीर पहले से ही कई संवेदनशील मुद्दों से घिरा हुआ है, और ऐसे में धार्मिक छुट्टियों पर इस तरह का विवाद लोगों के बीच और भी ज़्यादा बेचैनी पैदा कर सकता है।






