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हमास की ना के मायने, ट्रम्प के गाजा प्लान की अंदरूनी पड़ताल…

The meaning of Hamas's no: an inside look at Trump's Gaza plan...

Breaking Today, Digital Desk : आप सोच रहे होंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने जब गाजा के लिए अपना ‘शांति प्लान’ पेश किया था, तो उसके बाद क्या हुआ? खासकर, हमास की तरफ से कोई जोरदार जवाब क्यों नहीं आया? क्या हमास ने इसे नजरअंदाज कर दिया, या इसके पीछे कुछ और गहरी वजहें हैं? आइए, इस पहेली को थोड़ा सुलझाते हैं।

एक योजना, और खामोशी… क्यों?

जब कोई इतनी बड़ी योजना पेश करता है, तो उम्मीद होती है कि उस पर तुरंत प्रतिक्रिया आएगी। लेकिन ट्रम्प के गाजा शांति प्रस्ताव के मामले में, हमास की तरफ से ऐसी कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं आई जैसी शायद कुछ लोग उम्मीद कर रहे थे। इसकी कुछ वजहें हो सकती हैं जो शायद हमें सीधी-सीधी दिखती नहीं हैं।

1. “हमें पूछा ही नहीं!” – हमास की नाराज़गी

सबसे पहली और शायद सबसे बड़ी वजह यह है कि हमास को इस प्लान को बनाने की प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया। सोचिए, अगर आपके लिए कोई फैसला लिया जाए और आपसे पूछा भी न जाए, तो आपको कैसा लगेगा? हमास खुद को गाजा का एक प्रमुख हिस्सा मानता है, और अगर उन्हें ही इस शांति प्रक्रिया से बाहर रखा जाए, तो वे इसे क्यों स्वीकार करेंगे? उनके लिए, यह एक ऐसा प्लान है जो उन्हें दरकिनार करता है, और इसलिए वे इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

2. इज़रायल का प्रभुत्व – हमास को स्वीकार नहीं

इस प्लान में इज़रायल को काफी फायदा पहुंचाता हुआ दिखाया गया है। इसमें ऐसी बातें हैं जो इज़रायल के पक्ष में ज्यादा हैं, जैसे कि यरूशलेम को इज़रायल की राजधानी मानना या वेस्ट बैंक में इज़रायली बस्तियों को बनाए रखना। हमास के लिए, जो फिलिस्तीनी अधिकारों के लिए लड़ता आया है, ऐसी कोई भी योजना स्वीकार्य नहीं है जो इज़रायल के प्रभुत्व को बढ़ाए। उन्हें लगता है कि यह फिलिस्तीनी आकांक्षाओं के खिलाफ है।

3. प्लान की विश्वसनीयता पर सवाल

बहुत से लोग इस प्लान को “पक्षपाती” मानते हैं। उनका कहना है कि यह अमेरिका और इज़रायल के हितों को ज्यादा साधता है, न कि फिलिस्तीनियों के। ऐसे में, हमास जैसे संगठन को इस पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्हें लगता है कि यह एक वास्तविक शांति प्रस्ताव से ज्यादा, एक राजनीतिक दांवपेच है।

4. आंतरिक राजनीति और दबाव

हमास के अंदर भी कई गुट और विचारधाराएं हैं। किसी भी बड़े फैसले पर एक साथ आना उनके लिए भी आसान नहीं होता। हो सकता है कि वे अंदरूनी तौर पर इस प्लान पर चर्चा कर रहे हों, या फिर वे सही समय का इंतजार कर रहे हों ताकि वे अपनी प्रतिक्रिया को रणनीतिक रूप से पेश कर सकें। उन पर अपने समर्थकों और अन्य फिलिस्तीनी गुटों का भी दबाव होता है।

5. अपनी ताकत दिखाने की कोशिश

हमास शायद यह भी दिखाना चाहता है कि वे ट्रम्प के प्लान को आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। वे अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चुप्पी भी कभी-कभी एक मजबूत राजनीतिक संदेश हो सकती है।

तो आगे क्या?

फिलहाल, गाजा और शांति प्रक्रिया में खामोशी है। हमास की गैर-प्रतिक्रिया कई जटिल कारणों का परिणाम है। यह सिर्फ एक प्लान को खारिज करना नहीं है, बल्कि यह पहचान, अधिकार और भविष्य की आकांक्षाओं की गहरी लड़ाई है। गाजा में शांति का रास्ता अभी भी बहुत लंबा और पेचीदा दिख रहा है।


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