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मैनेजर साहब का ‘नो फोन’ नियम, जब कर्मचारियों ने सिखाया ऐसा सबक कि भूल नहीं पाएंगे…

Manager sahab's 'no phone' rule, when the employees taught him a lesson that they will never forget

Breaking Today, Digital Desk : ऑफिस भी एक अजीब जगह है, यहाँ कब कौन सा नियम बन जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. ऐसा ही एक किस्सा है एक ऑफिस का, जहाँ के मैनेजर साहब ने एक दिन अचानक एक नया फरमान जारी कर दिया – “आज से ऑफिस में कोई भी अपना पर्सनल फोन इस्तेमाल नहीं करेगा.” बस फिर क्या था, इस एक नियम ने ऐसा बखेड़ा खड़ा किया कि मैनेजर साहब को न सिर्फ अपना फैसला वापस लेना पड़ा, बल्कि उन्हें एक बड़ी सीख भी मिली.

हुआ यूँ कि एक दिन मैनेजर साहब ने किसी कर्मचारी को अपने फोन पर व्यस्त देख लिया. उन्हें इतना गुस्सा आया कि उन्होंने तुरंत पूरे ऑफिस के लिए एक ईमेल भेज दिया, जिसमें लिखा था, “कल से कोई भी कर्मचारी ऑफिस के अंदर अपना फोन लेकर नहीं आएगा. सभी को अपना फोन अपनी गाड़ी में या लॉकर में रखना होगा. नियम का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.”

इस तुगलकी फरमान से सब कर्मचारी परेशान हो गए. किसी को अपने घर से जरूरी कॉल का इंतजार था, तो कोई अपने बच्चों के स्कूल से संपर्क में रहता था. लेकिन मैनेजर के गुस्से के आगे किसी की एक न चली.

अब कहानी में असली मोड़ तब आया, जब एक आईटी कर्मचारी, जिसका काम ही कंपनी के सर्वर और सिक्योरिटी को संभालना था, ने इस नियम का अक्षरशः पालन करने की ठान ली. दरअसल, उसके कई जरूरी काम, जैसे सिस्टम को सुरक्षित रखने वाले ऑथेंटिकेशन कोड्स, उसी के पर्सनल फोन पर आते थे. कंपनी ने उसे कोई ऑफिशियल फोन भी नहीं दिया था. जब बॉस का नियम आया, तो उसने बिना कोई सवाल किए, अपने फोन से ऑफिस के सारे जरूरी ऐप्स हटा दिए और फोन को अपनी कार में छोड़ना शुरू कर दिया.

एक दिन ऑफिस में सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी अचानक कंपनी का मेन सर्वर डाउन हो गया. चारों तरफ अफरातफरी मच गई, काम पूरी तरह से ठप हो गया. मैनेजर साहब, जो उस दिन घर से काम कर रहे थे, परेशान हो गए. उन्होंने तुरंत उस आईटी वाले कर्मचारी को फोन लगाना शुरू किया, ताकि वह जल्दी से इस समस्या को ठीक कर सके. लेकिन उसका फोन तो स्विच ऑफ आ रहा था. एक के बाद एक 17 मिस्ड कॉल करने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं आया, तो मैनेजर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया.

जैसे-तैसे दिन खत्म हुआ और कर्मचारी घर जाने के लिए अपनी गाड़ी के पास पहुंचा. उसने अपना फोन उठाया तो मैनेजर की अनगिनत मिस्ड कॉल्स देखकर हैरान रह गया. उसने मैनेजर को वापस कॉल किया. फोन उठाते ही मैनेजर उस पर बरस पड़े, “कहाँ थे तुम? सर्वर डाउन है और तुम्हारा फोन बंद था!”

कर्मचारी ने बड़े ही शांत भाव से जवाब दिया, “सर, मैं तो ऑफिस में ही था. लेकिन आपके नए नियम के मुताबिक, मैंने अपना फोन गाड़ी में रख दिया था. आपने ही তো कहा था कि ‘कोई अपवाद नहीं’ होगा.” यह सुनते ही मैनेजर साहब की बोलती बंद हो गई. उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ कि बिना सोचे-समझे बनाया गया एक नियम कंपनी के लिए कितना नुकसानदायक साबित हो सकता है.

अगली सुबह होते ही मैनेजर ने एक और ईमेल भेजा, जिसमें लिखा था कि ‘नो फोन’ वाला पुराना नियम तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है. इस घटना के बाद कर्मचारियों ने राहत की सांस ली और मैनेजर साहब ने भविष्य में कोई भी नियम बनाने से पहले दो बार सोचना सीख लिया

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