Sliderझकझकी

यहाँ रसोइये केवल आधे घंटे नहीं, बल्कि 24 घंटे लंगर तैयार करते…

Here the chefs prepare langar not just for half an hour but for 24 hours, and their real "earnings" will surprise you

Breaking Today, Digital Desk : अक्सर ऐसी सुर्खियाँ आती हैं कि किसी विशेष स्थान पर रसोइये केवल कुछ मिनट काम करते हैं और उनकी तनख्वाह बहुत अधिक होती है। ऐसी ही एक धारणा स्वर्ण मंदिर, अमृतसर के लंगर को लेकर भी हो सकती है। हालाँकि, सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा प्रेरणादायक और विशाल है। यहाँ रसोइये केवल आधे घंटे के लिए नहीं, बल्कि दिन-रात सेवा में जुटे रहते हैं, और उनकी असली “कमाई” रुपयों में नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की दुआओं और आत्मिक शांति में है।

श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में स्थित गुरु का लंगर दुनिया की सबसे बड़ी सामुदायिक रसोई है, जहाँ धर्म, जाति या लिंग का कोई भेद नहीं होता। यहाँ हर दिन 50,000 से लेकर 1,00,000 लोग एक साथ पंगत में बैठकर प्रसाद के रूप में लंगर छकते हैं। विशेष अवसरों पर यह संख्या और भी बढ़ जाती है। यह लंगर 24 घंटे, सातों दिन चलता है, जिसका अर्थ है कि यहाँ की रसोई कभी नहीं रुकती।

इस विशाल रसोई का प्रबंधन लगभग 300 स्थायी कर्मचारियों और हजारों स्वैच्छिक सेवकों (सेवादारों) द्वारा किया जाता है। कुछ रसोइये स्थायी कर्मचारी होते हैं, जिन्हें खाना पकाने का जिम्मा दिया जाता है, लेकिन लंगर का अधिकांश काम स्वयंसेवकों द्वारा ही किया जाता है, जो कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक सेवा करते हैं। स्वयंसेवक सब्जियां काटने से लेकर रोटियां बनाने, खाना परोसने और बर्तन साफ करने तक हर काम में हाथ बंटाते हैं यहाँ एक रोटी बनाने की मशीन भी है जो एक घंटे में 25,000 रोटियां बना सकती है, जिसका उपयोग भीड़ के समय किया जाता है

जहाँ तक वेतन की बात है, स्थायी कर्मचारियों को एक निर्धारित वेतन मिलता है, लेकिन हजारों स्वयंसेवकों के लिए उनकी “कमाई” आत्मिक संतुष्टि और गुरु की सेवा का अवसर है।वे इसे एक पवित्र कार्य मानते हैं और इसके लिए कोई पैसा नहीं लेते। लंगर का पूरा खर्च दुनिया भर से आने वाले दान से चलता है, जिसमें नकदी और खाद्य सामग्री दोनों शामिल हैं।

निष्कर्ष में, स्वर्ण मंदिर में आधे घंटे खाना बनाने वाली कहानी एक मिथक हो सकती है, लेकिन यहाँ की सच्चाई उससे कहीं बढ़कर है। यह सेवा, समानता और मानवता का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ हजारों लोग निःस्वार्थ भाव से मेहनत करते हैं ताकि कोई भी भूखा न सोए।

Related Articles

Back to top button