
Breaking Today, Digital Desk : मुंबई में दिवाली का माहौल हमेशा खास होता है, लेकिन इस बार शिवाजी पार्क के राज निवास पर हुई एक मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने इस दिवाली एक गेट-टुगेदर का आयोजन किया, जिसमें उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे के साथ शामिल हुए। यह सिर्फ एक पारिवारिक मिलन नहीं था, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में इसे एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर BMC चुनावों से पहले।
काफी समय बाद ठाकरे परिवार की इतनी बड़ी जुटान देखने को मिली, जिसमें उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, अमित ठाकरे और उनके परिवार के अन्य सदस्य एक साथ नजर आए। यह दृश्य कई लोगों के लिए सुखद आश्चर्य था, क्योंकि शिवसेना के विभाजन के बाद से उद्धव और राज के संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव आए थे।
क्या यह सिर्फ दिवाली की बधाई थी, या कुछ और?
राजनीति में कोई भी मुलाकात सिर्फ ‘औपचारिक’ नहीं होती, और खासकर जब बात ठाकरे परिवार की हो। इस मिलन से तुरंत बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह BMC चुनावों से पहले किसी बड़े गठबंधन की नींव रख रहा है? मुंबई महानगर पालिका (BMC) के चुनाव हमेशा से ही शिवसेना के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न रहे हैं। अब जब शिवसेना खुद दो फाड़ हो चुकी है, तो राज ठाकरे की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
जानकार मानते हैं कि अगर उद्धव और राज फिर से हाथ मिलाते हैं, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। दोनों के पास एक मजबूत मराठी वोट बैंक है और उनकी विचारधारा में भी काफी समानताएं हैं। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह मिलन किसी राजनीतिक समझौते में बदलेगा। लेकिन इतना तो तय है कि इस दिवाली मिलन ने राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
यह मुलाकात सिर्फ परिवार की दूरियों को कम करने वाली नहीं थी, बल्कि इसने भविष्य की राजनीति के लिए कई दरवाजे भी खोल दिए हैं। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह दिवाली की रोशनी सिर्फ रिश्तों में चमक लाएगी या राजनीतिक समीकरणों को भी रोशन करेगी।






