
Breaking Today, Digital Desk : लोकतंत्र की जड़ों पर हो रहे कथित हमले और ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों को लेकर आज देश की राजधानी दिल्ली की सड़कें सियासी गर्मी से तप रही हैं। विपक्ष के 300 से ज़्यादा सांसद, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में, संसद भवन से मार्च निकालकर चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय का घेराव करने निकल पड़े हैं। यह विशाल विरोध मार्च, विपक्ष की उस लड़ाई का प्रतीक है जो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लड़ी जा रही है।
विपक्षी दलों का यह साझा मोर्चा, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, और आम आदमी पार्टी समेत 25 से अधिक दल शामिल हैं, सुबह करीब 11:30 बजे संसद के मकर द्वार से रवाना हुआ। हाथों में ‘वोट चोरी बंद करो’ और ‘लोकतंत्र पर हमला बंद करो’ जैसी तख्तियां लिए, सांसद सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। इस विरोध का मुख्य कारण हाल ही में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए वे आरोप हैं, जिनमें उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान लगभग एक लाख से ज़्यादा वोटों की हेराफेरी का दावा किया था।
क्या हैं विपक्ष के मुख्य आरोप?
विपक्ष का आरोप है कि चुनावी धांधली कई तरीकों से की गई, जिनमें शामिल हैं:
डुप्लीकेट वोटर: एक ही व्यक्ति का नाम कई जगह मतदाता सूची में होना।
फर्जी पते: हजारों की संख्या में ऐसे वोटर पाए गए जिनके पते अमान्य या फर्जी थे।
एक पते पर कई वोटर: एक ही पते पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में मतदाताओं का पंजीकृत होना।
फॉर्म 6 का दुरुपयोग: नए मतदाताओं को जोड़ने वाले फॉर्म 6 का गलत इस्तेमाल किया गया।
इन आरोपों के अलावा, विपक्ष बिहार में हो रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया का भी पुरजोर विरोध कर रहा है, जिसे वे चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की एक कोशिश बता रहे हैं। कांग्रेस ने इन आरोपों को जनता तक पहुंचाने के लिए ‘वोटचोरी.इन’ (Votechori.in) नाम से एक वेब पोर्टल भी लॉन्च किया है।
चुनाव आयोग और सरकार का पक्ष
चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है और राहुल गांधी से अपने दावों के समर्थन में शपथ पत्र के साथ सबूत पेश करने को कहा है। कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने भी इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है और कहा है कि प्रस्तुत किए गए कुछ दस्तावेज़ असली नहीं हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग की है और विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें कमजोर कर रहा है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस मार्च के लिए इजाज़त नहीं दी है, लेकिन विपक्षी सांसद अपने निर्धारित कार्यक्रम पर अडिग हैं। यह टकराव इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में चुनावी सुधार और पारदर्शिता का मुद्दा भारतीय राजनीति के केंद्र में रहने वाला है।






