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जीत का चेहरा, हार की जिम्मेदारी, पीएम मोदी और बीजेपी का अटूट चुनावी रिश्ता…

The face of victory, the responsibility of defeat, the unbreakable electoral relationship between PM Modi and BJP...

Breaking Today, Digital Desk : जब बात बीजेपी के चुनावी सफर की आती है, तो एक नाम जो सबसे ऊपर आता है, वह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का। चाहे 2014 में मिली 282 सीटों की प्रचंड जीत हो या 2024 में 240 सीटों के साथ सत्ता में वापसी, पीएम मोदी ही पार्टी की चुनावी किस्मत तय करते दिखते हैं।

2014: जब मोदी लहर ने सब बदल दिया

2014 में जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वे बीजेपी को अकेले दम पर पूर्ण बहुमत दिला देंगे। उनकी रैलियों में उमड़ती भीड़, उनके भाषणों में एक नई ऊर्जा और ‘अच्छे दिन’ का वादा – इन सबने मिलकर एक ऐसी लहर पैदा की, जिसने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को सत्ता से बाहर कर दिया। उस चुनाव में बीजेपी ने 282 सीटें जीतीं, जो पिछले कई सालों में किसी एक पार्टी को मिली सबसे बड़ी जीत थी। यह मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व और उनकी विकासोन्मुखी छवि का ही कमाल था।

2019: लहर और मजबूत हुई

2019 का चुनाव एक बार फिर मोदी के नेतृत्व में लड़ा गया। इस बार पुलवामा हमले और बालाकोट स्ट्राइक जैसे मुद्दे भी हावी थे। राष्ट्रवाद और मजबूत नेतृत्व का संदेश जनता तक पहुंचा। नतीजे चौंकाने वाले रहे – बीजेपी ने 303 सीटें जीतकर 2014 का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस जीत ने यह साफ कर दिया कि भारतीय राजनीति में मोदी का कद कितना बड़ा हो चुका है। विरोधी दल चाहे जितनी कोशिश करते रहे, वे मोदी के आगे टिक नहीं पाए।

2024: सीटें कम हुईं, पर चेहरा वही

2024 के लोकसभा चुनाव बीजेपी के लिए थोड़े चुनौतीपूर्ण रहे। इस बार पार्टी अकेले दम पर बहुमत का आंकड़ा (272) पार नहीं कर पाई और 240 सीटों पर आकर रुक गई। हालांकि, एनडीए गठबंधन ने बहुमत हासिल कर लिया और नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। यह सच है कि बीजेपी को उम्मीद से कम सीटें मिलीं, लेकिन यह भी सच है कि अगर मोदी जैसा चेहरा न होता, तो शायद पार्टी की स्थिति और भी खराब हो सकती थी।

चुनाव प्रचार के दौरान यह साफ था कि बीजेपी का हर पोस्टर, हर नारा मोदी के इर्द-गिर्द ही बुना गया था। ‘मोदी की गारंटी’ और ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ जैसे नारे इस बात का सबूत थे कि पार्टी आज भी उन्हीं पर निर्भर करती है। सीटों का आंकड़ा कम होने के बावजूद, आज भी यह पीएम मोदी की लोकप्रियता और उनकी स्वीकार्यता ही है जो बीजेपी को सत्ता के शिखर पर बनाए रखती है।

आगे क्या?

भले ही बीजेपी को गठबंधन सरकार चलानी पड़ रही है, लेकिन पीएम मोदी का प्रभाव कम नहीं हुआ है। वह आज भी पार्टी के सबसे बड़े नेता, सबसे बड़े स्टार प्रचारक और सबसे बड़े गेम चेंजर हैं। आने वाले सालों में भी बीजेपी की चुनावी रणनीति में पीएम मोदी का चेहरा और उनकी नीतियां ही केंद्र में रहने वाली हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि बीजेपी की चुनावी नियति आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही लिखते हैं।


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