
Breaking Today, Digital Desk : बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में जहाँ हर घर में मदद के लिए लोग चाहिए होते हैं, वहाँ अक्सर घरेलू काम करने वालों (यानी हमारी मेड्स, हाउस हेल्प) को लेकर कई तरह की दिक्कतें आती हैं। कभी सैलरी कम मिलती है, तो कभी काम के घंटे तय नहीं होते, और न ही कोई मेडिकल या पेंशन जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। लेकिन अब लगता है कर्नाटक सरकार इस दिशा में कुछ बड़ा करने वाली है।
खबर आ रही है कि कर्नाटक सरकार घरेलू काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक ‘रेट कार्ड’ लाने की सोच रही है। इसका मतलब है कि अब उनके काम के हिसाब से एक तय न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी। यह सिर्फ सैलरी की बात नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ मेडिकल सुविधाएँ, पेंशन और काम के घंटे भी फिक्स करने की योजना है। सोचिए, यह कितनी बड़ी राहत होगी उन हज़ारों महिलाओं और पुरुषों के लिए जो दिन-रात दूसरों के घरों को सँवारते हैं!
इस योजना के तहत, सरकार कोशिश कर रही है कि घरेलू काम को भी एक संगठित क्षेत्र (organised sector) की तरह देखा जाए। यानी जैसे दूसरी नौकरियों में नियम और फायदे होते हैं, वैसे ही इन्हें भी मिलें। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि उन्हें समाज में भी ज़्यादा सम्मान मिलेगा।
फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है, लेकिन अगर यह लागू हो जाता है तो यह वाकई में एक क्रांतिकारी कदम होगा। इससे घरेलू काम करने वालों की जिंदगी में एक नई सुबह आ सकती है, जहाँ उन्हें भी सुरक्षा और स्थायित्व का एहसास होगा।






