
Breaking Today, Digital Desk : पुतिन ने ज़ेलेंस्की के वॉशिंगटन दौरे से ठीक पहले ट्रंप को फोन किया? ये एक ऐसा सवाल है जो कई लोगों के मन में कौंध रहा है। क्या यह महज़ एक संयोग था, या फिर इसके पीछे कोई गहरी रणनीति काम कर रही थी? जब यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन पहुंचने वाले थे, उसी समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करना, निश्चित रूप से भौंहें चढ़ा देने वाली घटना थी।
विश्लेषक और राजनयिक गलियारों में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि आखिर इस फोन कॉल का मकसद क्या हो सकता है। क्या पुतिन ट्रंप के जरिए अमेरिका की अंदरूनी राजनीति में कोई संदेश भेजना चाहते थे? या फिर उनका इरादा ज़ेलेंस्की के दौरे से पहले ही माहौल को अपने पक्ष में करने का था? यह सोचना मुश्किल नहीं है कि पुतिन जैसे अनुभवी नेता ऐसे समय में कोई कदम बिना सोचे-समझे नहीं उठाते।
कुछ लोगों का मानना है कि यह पुतिन की एक सोची-समझी चाल थी, जिसका उद्देश्य ज़ेलेंस्की के अमेरिका दौरे की चमक को फीका करना था। ट्रंप और पुतिन के बीच पहले भी अच्छे संबंध रहे हैं, और ऐसे में पुतिन का ट्रंप से संपर्क साधना, कहीं न कहीं पश्चिमी देशों को एक संकेत देने की कोशिश हो सकती है कि वे अभी भी अमेरिकी राजनीति के कुछ हिस्सों में अपनी पैठ रखते हैं।
दूसरी तरफ, यह भी संभव है कि यह सिर्फ एक सामान्य बातचीत थी, जिसे बेवजह ज़्यादा महत्व दिया जा रहा हो। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ‘संयोग’ जैसी कोई चीज़ शायद ही होती है, खासकर जब बात रूस और अमेरिका के संबंधों की हो। ज़ेलेंस्की का वॉशिंगटन दौरा यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन जुटाने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण था, और ऐसे में पुतिन का यह कदम निश्चित रूप से एक “कैलकुलेशन” का हिस्सा लग रहा है।
कुल मिलाकर, इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं और यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की जटिलताओं को दर्शाता है। इसका असली मकसद क्या था, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस एक फोन कॉल ने वैश्विक मंच पर काफी हलचल मचा दी है।






