
Breaking Today, Digital Desk : दुनिया भर में, यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) मानवता की अमूल्य सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देता है। ये स्थल मानव रचनात्मकता, ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता के अद्भुत प्रमाण हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस प्रतिष्ठित सूची में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाए रखा है, जो देश की समृद्ध और विविध विरासत को दर्शाता है।
2025 तक, इटली 60 स्थलों के साथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में सबसे आगे है। इटली के बाद चीन (59), जर्मनी (54), फ्रांस (53) और स्पेन (50) का स्थान है। इस सूची में भारत 44 विश्व धरोहर स्थलों के साथ छठे स्थान पर है। यह रैंकिंग भारत को दुनिया के सबसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देशों में से एक के रूप में स्थापित करती है।
भारत के 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में 35 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल शामिल हैं। हाल ही में, 2025 में मराठा सैन्य परिदृश्य को इस सूची में जोड़ा गया था। इससे पहले, असम में अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली ‘मोइदम’ को 2024 में मान्यता दी गई थी।
भारत के विश्व धरोहर स्थलों में कुछ विश्व प्रसिद्ध नाम शामिल हैं, जैसे कि आगरा का ताजमहल, जिसे मुगल वास्तुकला का एक नगीना माना जाता है, और अजंता और एलोरा की गुफाएं, जो अपनी अद्भुत नक्काशी और चित्रों के लिए जानी जाती हैं। इन पहले स्थलों को 1983 में सूची में शामिल किया गया था। इनके अलावा, राजस्थान के पहाड़ी किले, हम्पी के स्मारक समूह, और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे स्थल भी इस सूची का हिस्सा हैं।
ये स्थल न केवल पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी सभ्यता, वास्तुकला, कला और प्राकृतिक विविधता के जीवंत प्रमाण भी हैं। यूनेस्को की यह मान्यता इन स्थलों के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए उन्हें संरक्षित रखने के वैश्विक महत्व को रेखांकित करती है।






