
Breaking Today, Digital Desk : बिहार की राजनीति में इन दिनों मछली और कलम पर खूब चर्चा हो रही है। लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव का मछली खाते हुए एक वीडियो सामने आया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने निशाना साधा। इसके बाद मामला सिर्फ मछली तक नहीं रुका, बल्कि कलम बांटने पर भी सवाल उठ गए।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब तेजस्वी यादव ने अपने X हैंडल पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में वह अपनी मां, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बड़े भाई तेज प्रताप यादव के साथ हेलीकॉप्टर में मछली खाते हुए दिख रहे थे। यह वीडियो तब का था जब वह एक चुनावी रैली से लौट रहे थे। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तुरंत वायरल हो गया और लोगों ने इस पर अपनी-अपनी राय देनी शुरू कर दी।
BJP का वार और RJD का पलटवार
अमित मालवीय ने तेजस्वी के इस वीडियो को लेकर उन पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि यह मछली खाने वाला वीडियो नवमी के दिन का है, जब ज्यादातर लोग मांस-मछली नहीं खाते। मालवीय ने तेजस्वी पर हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव हिंदू विरोधी राजनीति कर रहे हैं।
लेकिन, RJD ने भी तुरंत पलटवार किया। RJD नेताओं ने साफ किया कि वह वीडियो 8 अप्रैल का था, न कि 9 अप्रैल यानी नवमी का। उन्होंने BJP पर बेवजह सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया। RJD ने कहा कि BJP को मुद्दों से भटकाने के बजाय बिहार के असली सवालों पर बात करनी चाहिए।
कलम बांटने पर भी सवाल
यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक और विवाद खड़ा हो गया। तेजस्वी यादव ने अपने चुनावी प्रचार के दौरान कुछ बच्चों को कलम बांटे। इस पर भी BJP ने सवाल उठाए। अमित मालवीय ने तेजस्वी पर हमला बोलते हुए कहा कि वे चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, क्योंकि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद इस तरह से बच्चों को कुछ बांटना गलत है।
RJD ने इस पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कलम बांटना कोई गलत बात नहीं है और यह बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने का एक तरीका था। उन्होंने BJP पर हर छोटी बात को मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
सियासी तापमान गरम
अब सवाल यह उठता है कि क्या ये मछली और कलम वाले मामले बिहार के चुनाव को प्रभावित कर पाएंगे? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मुद्दे चुनाव से पहले सियासी गर्मी तो बढ़ा देते हैं, लेकिन मतदाता आखिर में विकास, रोजगार और स्थानीय मुद्दों पर ही वोट डालते हैं। हालांकि, हर पार्टी अपनी रणनीति के तहत ऐसे ‘सॉफ्ट’ मुद्दों को भी भुनाने की कोशिश करती है ताकि माहौल उसके पक्ष में बन सके।
देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और क्या-क्या देखने को मिलता है। लेकिन, इतना तो तय है कि इस बार चुनाव में ‘थाली’ से लेकर ‘कलम’ तक, सब पर नजर रहेगी।






