
Breaking Today, Digital Desk : फराह खान ने हाल ही में अपनी फिल्म ‘तीस मार खान’ को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि ये फिल्म वैसी फ्लॉप नहीं थी जैसा इसे बताया गया। उन्होंने बताया कि फिल्म ने 60 करोड़ रुपये कमाए थे, लेकिन फिर भी इसे बुरी तरह से ‘रिप्ड अपार्ट’ (यानी बहुत आलोचना) किया गया।
ये बात तो सच है कि जब कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करती है, तो उसे फ्लॉप कहना थोड़ा अजीब लगता है। खासकर तब जब फिल्म ने इतनी बड़ी रकम कमाई हो। फराह खान ने शायद इसी बात पर अपनी नाराजगी जाहिर की है कि कमाई के बावजूद फिल्म को सिर्फ उसकी कहानी या डायरेक्शन की वजह से इतना टारगेट किया गया।
‘तीस मार खान’ एक ऐसी फिल्म थी जिसे लेकर दर्शकों की राय बंटी हुई थी। कुछ को ये हल्की-फुल्की कॉमेडी लगी, तो कुछ को इसमें कुछ खास दम नहीं दिखा। लेकिन फराह खान के इस बयान के बाद एक बार फिर ये सवाल उठ रहा है कि क्या बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ही फिल्म की सफलता का एकमात्र पैमाना होना चाहिए, या फिर क्रिटिक्स की राय भी उतनी ही जरूरी है?
कई बार ऐसा होता है कि एक फिल्म जो कमाई तो अच्छी कर लेती है, लेकिन उसे दर्शकों और आलोचकों का प्यार नहीं मिलता। वहीं, कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जो शायद बहुत ज्यादा कमाई न करें, लेकिन उन्हें कल्ट क्लासिक का दर्जा मिल जाता है।
फराह खान का ये बयान बॉलीवुड में फिल्म की सफलता और असफलता को लेकर चल रही बहस को एक नई दिशा दे सकता है। ये सोचने पर मजबूर करता है कि क्या सिर्फ पैसों से ही फिल्म की कीमत तय होती है, या उसके पीछे लगी मेहनत, क्रिएटिविटी और दर्शकों से जुड़ाव भी मायने रखता है।






