
Breaking Today, Digital Desk : कर्नाटक में कांग्रेस की शानदार जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान ने सबको चौंका दिया है। एक तरफ हैं अनुभवी सिद्धारमैया, तो दूसरी तरफ हैं ऊर्जावान डी.के. शिवकुमार। दोनों ही अपनी-अपनी जगह मजबूत और काबिल नेता हैं, लेकिन कुर्सी एक ही है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर ये शक्ति प्रदर्शन क्यों हो रहा है और इसका नतीजा क्या निकलेगा?
कांग्रेस हाईकमान के लिए यह किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ सिद्धारमैया हैं, जिनके पास मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का लंबा अनुभव है और जनमानस में उनकी पकड़ भी मजबूत है। वहीं, डी.के. शिवकुमार ने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पार्टी को एकजुट रखने और जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। उनके समर्थक उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
दिल्ली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं। खबरें आ रही हैं कि दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी दावेदारी मजबूती से पेश की है। पार्टी किसी भी तरह की गुटबाजी से बचना चाहती है, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक बात तो साफ है कि कांग्रेस को अब एक ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। क्या कोई ‘पावर शेयरिंग’ फॉर्मूला निकाला जाएगा? या फिर किसी एक नेता को कमान सौंपकर दूसरे को कोई महत्वपूर्ण पद दिया जाएगा? आने वाले कुछ घंटे कर्नाटक की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं।






