
Breaking Today, Digital Desk : रात का अंधेरा और भी गहरा हो गया है गाजा में। हर तरफ सिर्फ़ धुआँ, आग और चीखों की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं। ऐसा लगता है मानो पूरा गज़ा शहर ही आग की लपटों में घिरा हो। इजरायल की तरफ से बमबारी लगातार तेज होती जा रही है और शांति की जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी, वो भी अब धुएँ में मिलती नज़र आ रही है।
सोचिए, उन लोगों का क्या हाल होगा जो इन बम धमाकों के बीच अपने घरों में दुबके हुए हैं? छोटे बच्चे, बूढ़े, महिलाएँ – सबकी आँखों में एक ही डर है, एक ही सवाल है: क्या ये रात कभी खत्म होगी? क्या सुबह होगी? हर धमाका अपने पीछे तबाही और बर्बादी छोड़ जा रहा है। अस्पताल घायलों से भर गए हैं, और दवाएँ कम पड़ रही हैं।
शांति वार्ता की खबरें आती तो हैं, लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात। कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। दोनों तरफ से तनाव बढ़ता जा रहा है, और इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। पता नहीं कब तक ये स्थिति रहेगी, कब तक मासूमों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
इस पूरे माहौल में हमें सिर्फ़ एक ही बात याद रखनी चाहिए – युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है। इससे सिर्फ़ बर्बादी आती है, और कुछ नहीं। उम्मीद है कि जल्द ही कोई रास्ता निकलेगा और गाजा में फिर से अमन-चैन लौटेगा।




