
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में एच-1बी वीज़ा को लेकर कांग्रेस पार्टी की आलोचना के बाद, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पूर्व राजनयिक एम.के. भद्रकुमार के विचारों का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। रिजिजू का कहना है कि कांग्रेस भारत के हितों को कमज़ोर कर रही है और देश की सकारात्मक छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने घोषणा की थी कि वह एच-1बी वीज़ा धारकों के जीवनसाथी को काम करने की अनुमति देने वाले नियम को आसान बनाने की योजना बना रहे हैं। यह भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़ी राहत की खबर थी, क्योंकि इससे उनके परिवार के सदस्यों को अमेरिका में काम करने का अवसर मिलेगा। लेकिन इस पर कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया काफी हैरान करने वाली थी।
पूर्व राजनयिक एम.के. भद्रकुमार ने अपने एक लेख में कांग्रेस की आलोचना करते हुए लिखा था कि पार्टी ने इस सकारात्मक कदम की सराहना करने के बजाय, इसे भारत के लिए ‘विफल कूटनीति’ के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस को सचमुच लगता है कि भारत को अमेरिकी वीज़ा नीति में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है? उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की इस तरह की टिप्पणियां भारत के हितों के खिलाफ जाती हैं।
किरेन रिजिजू ने भद्रकुमार के इन विचारों का पूरी तरह से समर्थन किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “एम.के. भद्रकुमार ने कांग्रेस की मानसिकता को बिल्कुल सही पकड़ा है। जब भारत को कुछ अच्छा मिलता है, तो कांग्रेस नकारात्मक हो जाती है। वे भारत के वैश्विक सम्मान को कमज़ोर करने की हर कोशिश करते हैं।”
रिजिजू ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी को समझना चाहिए कि दुनिया भर में भारतीय प्रवासी हमारे देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। अमेरिका में लाखों भारतीय पेशेवर एच-1बी वीज़ा पर काम कर रहे हैं, और उनके परिवारों के लिए यह खबर किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। ऐसे समय में जब देश को एकजुट होकर इस उपलब्धि का जश्न मनाना चाहिए, कांग्रेस का यह रवैया निराशाजनक है।
यह कोई नई बात नहीं है कि जब भी भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई सफलता मिलती है, तो विपक्ष उसे नकारात्मक रूप में पेश करने की कोशिश करता है। लेकिन एच-1बी वीज़ा का मुद्दा सीधे-सीधे हज़ारों भारतीय परिवारों के भविष्य से जुड़ा है। ऐसे में कांग्रेस का यह रुख कई सवाल खड़े करता है। क्या वे भारत के हितों को सचमुच प्राथमिकता देते हैं, या सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं?






