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इंटरनेट ने शशि थरूर को क्यों घेरा, हर्षित राणा और अगरकर वाले ट्वीट पर बवाल…

Why did the internet surround Shashi Tharoor, the uproar over his tweets about Harshit Rana and Agarkar...

Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के गेंदबाज़ हर्षित राणा काफी सुर्खियों में रहे, जब उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के एक मैच के दौरान विपक्षी खिलाड़ी को ‘फ्लाइंग किस’ देने के बाद अपनी मैच फीस का 60% जुर्माना देना पड़ा। इस घटना पर सोशल मीडिया पर काफी बहस छिड़ गई, जिसमें कई लोगों ने हर्षित के व्यवहार की आलोचना की, तो कुछ ने इसे खेल का हिस्सा मानकर बचाव भी किया।

इसी कड़ी में, कांग्रेस नेता और जाने-माने लेखक शशि थरूर ने भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने एक ट्वीट के ज़रिए हर्षित राणा और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर को लेकर एक कटाक्ष किया, जो उन्हें भारी पड़ गया।

थरूर ने अपने ट्वीट में लिखा, “हर्षित राणा को अपनी उंगलियों का इस्तेमाल ‘फ्लाइंग किस’ देने के बजाय अपनी टीम के लिए विकेट लेने में करना चाहिए था। शायद अजीत अगरकर को उन्हें कुछ ‘फ्लाइंग सीख’ देनी चाहिए!”

शशि थरूर का यह ट्वीट आते ही इंटरनेट पर वायरल हो गया, लेकिन जिस तरह की प्रतिक्रिया की उन्होंने शायद उम्मीद की थी, वो उन्हें नहीं मिली। बल्कि, कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें ही आड़े हाथों ले लिया और उनकी “बड़ी गलती” के लिए उन्हें सबक सिखाया।

लोगों ने थरूर को याद दिलाया कि हर्षित राणा एक गेंदबाज हैं और वे अपनी उंगलियों का इस्तेमाल गेंदबाजी करने के लिए ही करते हैं, न कि “फ्लाइंग किस” देने के लिए। इसके अलावा, अजीत अगरकर एक चयनकर्ता हैं, कोच नहीं। उनका काम खिलाड़ियों का चयन करना है, उन्हें क्रिकेट की “फ्लाइंग सीख” देना नहीं।

एक यूजर ने ट्वीट किया, “सर, अगरकर चयनकर्ता हैं, कोच नहीं। और हर्षित राणा गेंदबाज हैं, वह अपनी उंगलियों का इस्तेमाल गेंदबाजी के लिए करते हैं।” दूसरे ने लिखा, “थरूर सर, आप भी कभी-कभी अजीब बातें कर जाते हैं। हर्षित का काम विकेट लेना है और अगरकर का काम टीम चुनना।”

इस तरह की प्रतिक्रियाओं से यह साफ हो गया कि थरूर का यह कटाक्ष ठीक से बैठ नहीं पाया और उन्हें उल्टा ही पड़ गया। कई बार बड़े नेता या मशहूर हस्तियां भी सोशल मीडिया पर अपनी राय देते हुए ऐसी गलतियां कर बैठती हैं, जिससे उनकी किरकिरी हो जाती है। यह घटना भी उसी का एक उदाहरण बन गई।

यह दिखाता है कि सोशल मीडिया पर कोई भी बात कहने से पहले कितनी सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब आप किसी सार्वजनिक पद पर हों या आपकी बात का बड़ा प्रभाव पड़ता हो।

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